आरोपित के वाहन पर निजी बैंक की फाइनेंस की किश्त बाकी थी। वहीं उसने उक्त वाहन किसी अन्य को तीन लाख रुपये में गिरवी दिया था। संबंधित से रुपये लेकर, उसके कब्जे से वाहन को रात में चोरी कर छिपा दिया। ताकि फाइनेंस की किश्त का झंझट नहीं रहे और गिरवी की एवज में लिए रुपये भी न देना पड़े।