भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल ग्रेटर नोएडा से शुरू हुई है. यहां स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जिम्स) में देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्लीनिक शुरू किया गया है. यह क्लीनिक न सिर्फ इलाज के तरीके को और सटीक बनाएगा, बल्कि भारतीय मरीजों के लिए खास तौर पर तैयार किए गए उपचार समाधान विकसित करने में भी मदद करेगा.अब तक भारत में इलाज के लिए जिन शोधों और तकनीकों का यूज होता रहा है, उनमें से ज्यादातर पश्चिमी देशों के डाटा पर आधारित हैं. क्योंकि वहां के लोगों की लाइफस्टाइल, खान-पान, जेनेटिक बनावट और बीमारियों का पैटर्न भारतीय लोगों से अलग होता है, इसलिए कई बार इलाज उतना प्रभावी नहीं हो पाता है. इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से जिम्स में इस एआई क्लीनिक की शुरुआत की गई है. क्या है एआई क्लीनिक और क्यों है यह खास?एआई क्लीनिक एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा. इस क्लीनिक में अस्पतालों का वास्तविक डाटा स्टार्टअप और शोधकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे उसी डाटा के आधार पर नई तकनीकें और इलाज के बेहतर तरीके विकसित कर सकें.इस डाटा में मरीजों की बीमारी का पैटर्न, जेनेटिक हिस्ट्री, इलाज की प्रतिक्रिया, मेडिकल इमेजिंग रिपोर्ट्स जैसी जरूरी जानकारियां शामिल होंगी. इन जानकारियों का अध्ययन करके एआई सिस्टम यह समझ सकेगा कि किसी खास बीमारी का इलाज भारतीय मरीजों में कैसे ज्यादा असरदार हो सकता है. क्या डॉक्टरों की जगह ले लेगी तकनीक?एआई क्लीनिक का मकसद डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी मदद करना है. एआई तकनीक डॉक्टरों को बेहतर फैसले लेने में मदद करेगी. जैसे मेडिकल रिपोर्ट्स को जल्दी और सही तरीके से समझना, बीमारियों की शुरुआती पहचान करना, इलाज के सही विकल्प सुझाना, क्लीनिकल वर्कफ्लो को आसान बनाना. डॉक्टरों की निगरानी और मार्गदर्शन में ही एआई आधारित समाधान तैयार किए जाएंगे और उन्हें पहले टेस्ट किया जाएगा. पूरी और सही मंजूरी मिलने के बाद ही इन्हें सरकारी अस्पतालों में लागू किया जाएगा. स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए बड़ा अवसरइस एआई क्लीनिक से हेल्थ टेक स्टार्टअप्स को बड़ा फायदा मिलेगा. अब तक सरकारी अस्पतालों का डाटा स्टार्टअप्स को आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता था, लेकिन इस पहल के जरिए एम्स, जिम्स जैसे संस्थान डाटा साझा कर सकेंगे.ग्रेटर नोएडा स्थित जिम्स के इंक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से स्टार्टअप्स को तकनीकी सहयोग, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और परीक्षण की सुविधा दी जाएगी. आईआईटी, एनआईटी और निजी कॉलेज भी इस क्लीनिक से जुड़कर अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के जरिए आगे बढ़ाएंगे. मरीजों के डाटा की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाएगी. एक मॉनिटरिंग कमेटी और एआई विशेषज्ञों की टीम सभी प्रस्तावों की जांच करेगी. सिर्फ वही नवाचार आगे बढ़ाए जाएंगे, जो व्यावहारिक, सुरक्षित और मरीजों के हित में होंगे. कब होगा फिजिकल लॉन्च?जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता के अनुसार, एआई क्लीनिक समय की जरूरत है, ताकि नई तकनीकें सीधे मरीजों और डॉक्टरों तक पहुंच सकें. इस क्लीनिक का फिजिकल लॉन्च 6 जनवरी को किया जाएगा. इससे पहले इसका ऑनलाइन शुभारंभ भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज, डॉ. सुजाता चौधरी ने किया. यह भी पढ़ें : AIIMS ने बदल दिए इलाज के नियम, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और रेफरल मरीजों को प्राथमिकताDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.