क्या आपके घर का पानी जहर बन रहा है? ऐसे करें सुरक्षित या खतरनाक पानी की पहचान

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पानी हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन कई बार होता है कि यही पानी धीरे-धीरे आपके शरीर को नुकसान पहुंचा रहा होता है और आपको इसका अंदाजा भी नहीं हो पाता है. अक्सर पानी देखने में बिल्कुल साफ होता है, टेस्ट भी ठीक लगता है, फिर भी उसी पानी से पेट की बीमारियां, उल्टी-दस्त, बुखार और दूसरी गंभीर समस्याएं फैल जाती हैं, जिसकी वजह साफ है, जल जनित बीमारियां कई बार बिना किसी चेतावनी के फैलती हैं. इसलिए इलाज कराने से बेहतर है कि समय रहते पानी की जांच कर ली जाए. अच्छी बात यह है कि पानी की शुरुआती जांच आप घर पर भी कर सकते हैं. घर पर की गई सही जांच आपको पहले ही सावधान कर सकती है कि पानी सुरक्षित है या कहीं यह धीमा जहर तो नहीं बन रहा है. घर पर कौन-सी पानी जांच किट सबसे ज्यादा काम की हैं?आजकल बाजार में कई तरह की वाटर टेस्टिंग किट मिल जाती हैं, जो पानी की क्वालिटी का शुरुआती अंदाजा देती हैं. जैसे - 1. कोलीफॉर्म और ई-कोलाई टेस्ट किट - यह किट पानी में खतरनाक बैक्टीरिया की मौजूदगी बताती है, जो अक्सर सीवर या गंदे पानी के मिलने से आते हैं.  यह टेस्ट 18 से 24 घंटे में नतीजा देता है. लगभग 90 प्रतिशत तक सटीक माना जाता है.  अगर इसमें बैक्टीरिया मिलते हैं, तो समझिए पानी पीने के लिए सुरक्षित नहीं है. 2. क्लोरीन टेस्ट किट - यह किट जांचती है कि नल के पानी में कीटाणु मारने वाला क्लोरीन मौजूद है या नहीं, खासकर नगर निगम की सप्लाई वाले इलाकों में यह बहुत जरूरी है. अगर पानी में क्लोरीन बिल्कुल नहीं है, तो उसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है यानि क्लोरीन न मिले तो पानी को असुरक्षित मानना चाहिए. 3. टर्बिडिटी टेस्ट ट्यूब - यह पानी में मौजूद बहुत बारीक गंदगी को पकड़ने में मदद करती है. बारिश के बाद पाइपलाइन में लीकेज होने पर यह टेस्ट खतरे का शुरुआती संकेत दे सकता है. अगर ट्यूब के नीचे बना निशान साफ न दिखे और धुंधला लगे, तो पानी मैला है. टीडीएस मीटर कितना सही हैबहुत से लोग टीडीएस मीटर को ही पानी की पूरी जांच मान लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है. टीडीएस मीटर सिर्फ पानी में घुले नमक और खनिजों की मात्रा बताता है. यह बैक्टीरिया, वायरस या कीटाणुओं के बारे में कुछ नहीं बताता है. टीडीएस रीडिंग का मतलब 300 mg/L तक पानी सामान्य माना जाता है,  300–600 mg/L  पीने लायक, लेकिन पूरी तरह आदर्श नहीं, वहीं 600 mg/L से ऊपर  पानी की क्वालिटी खराब मानी जाती है. लोग सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?पानी साफ दिखे तो उसे सुरक्षित मान लेते हैं. उबाले हुए पानी को पूरी तरह शुद्ध समझ लेते हैं. जबकि सच्चाई यह है कि उबालने से सिर्फ बैक्टीरिया मरते हैं. केमिकल, भारी धातुएं और जहरीले तत्व उबालने से खत्म नहीं होते हैं. ऐसे में घर पर पानी जांच किट का सही यूज करें. घर पर पानी जांच किट का सही इस्तेमाल कैसे करें?1. सबसे पहले साफ बर्तन में पानी लें.2. कोलीफॉर्म टेस्ट किट डालें और 18–24 घंटे बाद रंग में बदलाव देखें.3. क्लोरीन टेस्ट किट में बताए गए ड्रॉप डालें. अगर रंग न आए, तो पानी सुरक्षित नहीं है.4. टर्बिडिटी ट्यूब में पानी भरें, नीचे का निशान धुंधला दिखे तो पानी गंदा है. 5. टीडीएस मीटर से रीडिंग लें और स्तर समझें. यह भी पढ़ें : Heart Attack Treatment Time: भरी मीटिंग में हार्ट अटैक से बीजेपी विधायक की मौत, ऐसे केस में जान बचाने को कितना होता है वक्त?