दिल्ली नगर निगम का रिकॉर्ड :संजीव हंस का बेटा सम्राट:जिसके बाप का पता लगाने को DNA जांच की मांग उठी, वह स्कूल डॉक्यूमेंट्स में IAS का बेटा

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नाम- ’सम्राट’ (उपनाम) मां- गायत्री कुमारी पिता- संजीव हंस जन्म का पता- औरंगाबाद, बिहार रिकॉर्ड- दिल्ली नगर निगम (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) यह दिल्ली नगर निगम के रिकॉर्ड से भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम के हाथ लगा बिहार के एक हाई प्रोफाइल मामले का डॉक्यूमेंट है। जिसमें दिल्ली नगर निगम ने ‘सम्राट’ (उपनाम) को संजीव हंस का बेटा बताया है। इसी दस्तावेज से आधार कार्ड में भी सम्राट के पिता का नाम संजीव हंस दर्ज किया गया है। स्कूल में भी सम्राट के पिता का नाम संजीव हंस ही दर्ज है। घर से लेकर बाहर तक पिता का नाम संजीव हंस बताने वाला सम्राट एडवोकेट गायत्री का बेटा है। गायत्री ने ही बिहार के सीनियर IAS संजीव हंस पर गैंगरेप का आरोप लगाया था। हालांकि कोर्ट ने उनका केस क्वेश कर लिव इन का मामला बता दिया है। गायत्री संजीव हंस को अपने बेटे का पिता होने का दावा करती हैं, इसके लिए वह DNA जांच की भी मांग कर चुकी हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में देखिए और पढ़िए 8 साल के सम्राट से जुड़ी गायत्री और संजीव हंस की पूरी कहानी..। दिल्ली से पटना तक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन पहले रेप का आरोप फिर ED की गिरफ्तारी के 16 महीने बाद संजीव हंस की बहाली हुई है। पटना हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद संजीव हंस को बिहार सरकार ने वित्त विभाग में पोस्टिंग दी है। संजीव हंस पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला एडवोकेट कहां और किस हाल में है? महिला ने अपने जिस इकलौते बेटे को संजीव हंस का बेटा बताया वह कहां और किस हाल में है? डॉक्युमेंट्स में महिला एडवोकेट के बेटे का पिता कौन है? वह कहां पढ़ता है? दोस्तों और अन्य लोगों को वह अपने पिता का क्या नाम बताता है? ऐसे सवालों का जवाब ढूंढने के लिए दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने दिल्ली, प्रयागराज, औरंगाबाद से लेकर पटना तक इन्वेस्टिगेशन की। भास्कर ने खंगाला दिल्ली नगर निगम का रिकॉर्ड इन्वेस्टिगेशन में हमने सबसे पहले महिला एडवोकेट के एड्रेस को निकाला। बिहार के औरंगाबाद के जय गोविंदनगर का पता हमारे हाथ लगा। इस पते पर इन्वेस्टिगेशन शुरू की तो पता चला कि यह गायत्री के मायके का पता है। गायत्री का मां और भाइयों से संबंध बेहतर नहीं हैं। संपत्ति को लेकर महिला का उसके मायके वालों से विवाद चल रहा है। मायके वालों से कोई सटीक जानकारी नहीं मिली। इसके बाद हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम ने स्थानीय प्रशासन का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। यहां से भी गायत्री और उनके बेटे से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली। काफी छानबीन के बाद औरंगाबाद और पटना से हमें गायत्री की इलाहाबाद (यूपी) की डिटेल मिली। यह जानकारी मिली कि महिला एडवोकेट प्रयागराज (इलाहाबाद) में रहकर प्रैक्टिस करती हैं। इन्वेस्टिगेशन के दौरान औरंगाबाद और पटना से हमे दिल्ली का इनपुट मिला। जानकारी मिली कि एडवोकेट गायत्री के बेटे का कुछ डॉक्युमेंट्स दिल्ली नगर निगम से जारी हुआ है। इस इनपुट को आधार बनाकर हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम ने दिल्ली नगर निगम के रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दिल्ली नगर निगम में हमें कुछ सोर्स के जरिए कुछ अहम जानकारी हासिल हुई। दिल्ली नगर निगम से जारी हुआ है जन्म प्रमाण-पत्र भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम को दिल्ली नगर निगम के रिकॉर्ड खंगालने के बाद एडवोकेट गायत्री कुमारी के बेटे का जन्म प्रमाण-पत्र मिला। दिल्ली नगर निगम ने 0125-109102920XXXX नंबर से एडवोकेट गायत्री के बेटे सम्राट का जन्म प्रमाण-पत्र जारी किया है। 9 अक्टूबर 2025 को जारी जन्म प्रमाण-पत्र को लेकर दिल्ली नगर निगम ने बताया है कि (रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ एक्ट, 1969 के सेक्शन 17 और दिल्ली रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ रूल, 1999 के 8/13 के तहत जारी) किया गया है। नगर निगम की तरफ से जारी जन्म प्रमाण-पत्र को लेकर बताया गया कि यह सर्टिफाई किया जाता है कि नीचे दी गई जानकारी BIRTH के ओरिजिनल रिकॉर्ड से ली गई है जो रोहिणी जोन N.C.T. दिल्ली के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली का रजिस्टर है। दिल्ली नगर निगम के सोर्स से मिली जानकारी के मुताबिक जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए मां एडवोकेट गायत्री कुमारी का आधार कार्ड और पिता के रूप में संजीव हंस का आधार कार्ड सबमिट किया गया है। जन्म प्रमाण-पत्र में सम्राट की डेट ऑफ बर्थ 25 दिसंबर 2018 दर्ज है जबकि बर्थ प्लेस कुमार एम ई डी एंड एम टी वाई सेंटर रोहिणी टाउन डिस्ट्रिक सेंटर नार्थ वेस्ट दिल्ली दर्ज है। रजिस्ट्रेशन की तिथि 31 जनवरी 2019 दर्ज की गई है। सम्राट के बर्थ सर्टिफिकेट में रजिस्ट्रेशन नंबर MCDOLIR - 2219 - 00729XXXX दर्ज है। मां का नाम गायत्री कुमारी और पिता का नाम संजीव हंस दर्ज है। जबकि वर्तमान और जन्म के समय का पता कटया जय गोविंद नगर औरंगाबाद दर्ज है। यही पता स्थाई पते के रूप में दर्ज है। 7 साल बाद बना जन्म प्रमाण-पत्र एडवोकेट गायत्री कुमारी के बेटे का जन्म 25 दिसंबर 2018 को हुआ, लेकिन जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने में 7 साल लग गए। इसे लेकर जब पड़ताल की गई तो पता चला कि महिला के पास ऐसे कोई स्पोर्टिंग डॉक्युमेंट्स ही नहीं थे जिसके आधार पर वह बाकी की फार्मेलिटी पूरी कर सके। इसलिए रजिस्ट्रेशन 2019 में होने के बाद जन्म प्रमाण-पत्र अक्टूबर 2025 को जारी हो सका है। डॉक्युमेंट्स के कारण गायत्री के बेटे की पढ़ाई में भी बाधा आई है। कई जरुरी डॉक्युमेंट्स नहीं होने के कारण उसका स्कूल में दाखिला भी देरी से हुआ। बड़े कॉन्वेंट स्कूल में पिता का नाम संजीव हंस गायत्री के 7 साल के बेटे सम्राट (उपनाम) की पढ़ाई कहां चल रही है? वह किस क्लास और किस शहर के किस स्कूल में पढ़ रहा है? भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने इसकी भी पड़ताल की है। काफी छानबीन के बाद प्रयागराज (इलाहाबाद) में गायत्री के बेटे के स्कूल का पता चला। इसी कड़ी में हमें इलाहाबाद के एक बड़े कॉन्वेंट स्कूल के बारे में पता चला। स्कूल में सोर्स तलाशने के बाद हम एडवोकेट गायत्री के बेटे के बारे में कई अहम जानकारी हासिल करने में सफल हुए। देश के टॉप स्कूलों में शामिल एक बड़े स्कूल की इलाहाबाद ब्रांच में एडवोकेट का बेटा सम्राट क्लास एक (हम सेक्शन सुरक्षा के लिहाज से स्कूल का नाम और सेक्शन नहीं बता रहे हैं) में पढ़ रहा है। इन्वेस्टिगेशन के दौरान एडमिशन नंबर से लेकर बेटे से संबंधित कई अन्य डॉक्युमेंट्स हमारे हाथ लगे हैं। सोर्स के मुताबिक स्कूल में एडमिशन के लिए संजीव हंस और एडवोकेट गायत्री कुमारी का आधार कार्ड सबमिट किया गया है। इसके साथ जन्म प्रमाण-पत्र भी स्कूल में एडमिशन के समय सबमिट किया गया है। सम्राट का जो आधार स्कूल के डॉक्युमेंट्स में सबमिट है, उसमें भी पिता का नाम संजीव हंस और मां का नाम गायत्री कुमारी दर्ज है। दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम के हाथ लगे स्कूल के डॉक्युमेंट्स में भी सम्राट की मां का नाम गायत्री कुमारी और पिता का नाम संजीव हंस दर्ज है। हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम को सम्राट गायत्री और संजीव हंस से जुड़े और भी कुछ अहम ऑडियो और डॉक्युमेंट्स मिले हैं, लेकिन सम्राट की सुरक्षा को लेकर हम उसे सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। डॉक्युमेंट्स में हर जगह सम्राट के पिता का नाम संजीव हंस ही है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में दिल्ली नगर निगम और स्कूल के डॉक्युमेंट्स से स्पोर्टिंग डॉक्युमेंट्स में लगाया गया संजीव हंस का आधार कार्ड भी मिला है, जिसमें संजीव हंस का पता अमृतसर पंजाब दर्ज है। संजीव का सिंगल मदर चाइल्ड का था प्रपोजल दिल्ली और प्रयागराज में इन्वेस्टिगेशन के दौरान भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को इनपुट मिला कि संजीव हंस जन्म प्रमाण-पत्र में अपना नाम नहीं देना चाहते थे। संजीव हंस का आधार कार्ड दिल्ली नगर निगम और इलाहबाद के स्कूल में कहां से आया? महिला एडवोकेट संजीव हंस के निलंबन मुक्त होने के बाद केस को लेकर क्या कर रही है? ऐसे कई सवालों के जवाब को लेकर हमें महिला एडवोकेट तक पहुंचना जरुरी था। हम इलाहाबाद में मौजूद महिला एडवोकेट से संपर्क किए और एक एक सवालों का जवाब ढूंढने की कोशिश कई। पहला सवाल था कि क्या संजीव हंस बेटे को अपना नाम देने को तैयार थे? इसके जवाब में एडवोकेट गायत्री कुमारी ने कहा - नहीं, संजीव हंस तो बोल बोल रहे थे कि सिंगल मदर चाइल्ड लिखवा दो। इस पर हमे विश्वास नहीं हो रहा था, तब गायत्री ने हमे संजीव हंस और अपनी बातचीत का 8 मिनट 43 सेकेंड का एक आडियो क्लिप दिया। गायत्री ने दावा कि संजीव हंस ने खुद उनके इलाहाबाद आवास पर आकर अपना आधार कॉर्ड दिया था। एडवोकेट गायत्री ने यह भी दावा किया कि संजीव हंस उस दिन उनके साथ पति की तरह ही घर में रहे थे। ऑडियो में ब्लैक मनी और बेटे के एडमिशन की बातचीत संजीव हंस - कुछ एराउंड 20 के करीब का व्हाइट का अरेंज हो गया है। बाकी का भी इंतजाम करना है। बिल्डर का नंबर मिल जाता है तो मै वैसे लोगों को साथ में लगा देता। तो वे अपने हिसाब से एडजेस्ट कर लेते। क्योंकि मार्च का समय आ गया है, लोगों को दिक्कत हो रही है। गायत्री - आपको सेंड करुं या उसे नंबर भेजूं? संजीव हंस - मुझे सेंड कर दीजिए। उसको नहीं भेजना है, वह तो कुछ और कहानी शुरू कर देगा। गायत्री - ठीक है, मैं आपको नंबर भेज देती हूं। संजीव हंस - इसी सिलसिले में मैं निकलूंगा, कल व्यस्त रहूंगा। ये वाला फोन लेकर नहीं जाउंगा। कांटेक्ट करना होगा तो मैं ही करुंगा। बिल्डर से लोग डायरेक्ट बात कर लेंगे तो वह अपने हिसाब से पूछ भी लेंगे, कितना मैनेज हो सकता है। गायत्री - ठीक है। संजीव हंस - कौन बात कर रहा है बिल्डर से आप या कोई और? गायत्री - नहीं मैं ही बात कर रही हूं और कौन करेगा। संजीव हंस - ठीक है, तुम्हारा नाम लेकर ही वह बात करेगा। वह सब डील कर लेगा, कितना व्हाइट करना है, पूरा कर लेगा। गायत्री - ठीक है। संजीव हंस - और बताओ बाकी क्या चल रहा है? गायत्री - कुछ नही चल रहा है। संजीव हंस - एडमिशन का भी बोल दिए हैं, हो जाएगा। गायत्री - हो जाएगा? संजीव हंस - हां हो जाएगा, लोग लगे हैं हो जाना चाहिए। गायत्री - बर्थ सर्टिफिकेट का क्या सोचे हैं? संजीव हंस - कुछ चीज तो हमें पर्दे में रखना पड़ता है ना, उसका सोचा भी है। हमारे नाम से आगे के लिए उसको दिक्कत हो जाएगी। हमें नहीं दिक्कत होगी, दिमाग में उसके भरा रहेगा। मैं तो शुरू से इसीलिए बोल रहा हूं आप सिंगल मदर का करो वो ज्यादा बेहतर होगा। पॉजिटिव रहेगा, हमेशा के लिए। गायत्री - आफिशियली कोई दिक्कत तो नहीं होगी, नाम देने से आगे कोई समस्या तो नहीं आएगी ना? संजीव हंस - कुछ चीजें मान लेनी चाहिए, सामने बैठकर बात हो जाएगी। हर बात में दिमाग लगाने से नहीं होगा। मैं जैसा बताऊंगा वो पॉजिटिव के लिए ही होगा। गायत्री - अच्छा। संजीव हंस - मैंने बोला था ना,एक दूसरे की हम लोगों को देखनी है। कोई थर्ड पर्सन नहीं देखेगा। मैं बताता हूं, बैठेंगे न कभी तो पूरा सेट कर लिया जाएगा। बेहतर ही होगा, पॉजिटिव और लांग टर्म होगा। इस सब में तो दूसरी दूसरी बात शुरू हो जाएगी। आई विल टेल यू..। गायत्री - किसके तरफ से दूसरी बात शुरू हो जाएगी, आपके तरफ से? संजीव हंस - नहीं, नहीं हम दोनों से लीक नहीं होंगी बातें, फोन पर नहीं बताऊंगा, बैठेंगे तो बात हो जाएगी। गायत्री - समझ नहीं पाई, किस तरह की बाते शुरू हो जाएगी। संजीव - बताऊंगा ना, कई तरह की बात है। जब भी नेक्स्ट हम लोग मिलते हैं तो इस लाइन पर बात करेंगे। एक बार सोचकर हम ही लोगों को कुछ करना पड़ेगा। बताऊंगा मैं, सब कुछ बताउंगा। गायत्री - ऐसा कुछ सोचिएगा जिससे उसके फ्यूचर पर कोई असर नहीं पड़े? संजीव हंस - हां, उसी की बात कर रहा हूं, उसी के फ्यूचर के लिए ही बात कर रहा हूं। क्योंकि हम लोगों से ज्यादा उसी को ही रहना है। समझ रही हैं ना क्या बोल रहा हूं। गायत्री - ठीक है, मैं इंतजार करुंगी। संजीव हंस - जल्दी कौन मचा रहा है, बिल्डर या सुनील? गायत्री - बिल्डर ही जल्दी मचाए हुए है। संजीव - नहीं समझ रहीं है, इधर उधर से आएगा तो दिक्कत हो जाएगी। वह तो इतना देखा नहीं होगा, यहां तो करोड़ से कम कोई बात ही नहीं करता है। मार्केट से उठाएगा 10 आदमी से ताे 10 आदमी तक बात जाएगी। हम लोग अपने हिसाब से निकाल कर रकेंगे। वह ऐसे लोगों से बात किया होगा जो पहले से गंदगी में घुसे हुए होंगे। गायत्री - आपका मोबाइल दोबारा ऑन ही नहीं होगा? संजीव हंस - हम कहां गायब हो जाएंगे। पांच साल से गायब नहीं हुआ तो अब कहां गायब हो जाउंगा। गायत्री - केस हुआ तो सामने आ गए नहीं तो गायब ही तो रहते थे। संजीव हंस - वो दूसरी बात थी, तुम भी जान रही हो मैं भी जान रहा हूं। गायत्री - बच्चे कहा हैं? संजीव हंस - दिल्ली में ही हैं। बिल्डर काम नाम नंबर दे दो तो मैं लोगों को लगा देता हूं। गायत्री - बाबू के बर्थ सर्टिफिकेट का सोचिएगा जरूर, बना नहीं है अभी तक हमको बहुत टेंशन होता है। संजीव हंस - चिंता मत करो उसका भी उपाय कर लेंगे। इतनी बात हो गई तो एक एक करके सब काम हो जाएगा। ऐसे थोड़ी होता है, जब बोल दिया तो बोल दिया। गायत्री बोली - केस के बाद 2022 में संजीव ने बात किया ऑडियो को लेकर जब गायत्री से हमने सवाल किया कि ये कब की बातचीत है तो उन्होंने बताया कि जब मैंने दानापुर कोर्ट में एफआईआर किया था, इसके बाद 2022 में बात हो रही है। केस के बाद जो फ्लैट दिया गया है, उसके संबंध में ही संजीव की बातचीत है। फ्लैट के पैसे को लेकर ही ब्लैक और व्हाइट मनी की बात कर रहे हैं। इसकी रजिस्ट्री मार्च 2022 में हुई है। पैसे अकाउंट में डलवाया है, मैंने कुछ ही बच्चे के बारे में बार बार सर्टिफिकेट का बोला है। गायत्री का दावा है कि बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए ही संजीव ने अपना आधार कार्ड दिया है। वह 2022 में इलाहाबाद में फ्लैट पर आकर आधार दिया था। उस दौरान हस्बैंड वाइफ की तरह संजीव हमारे साथ रहे भी थे। गायत्री ने सुरक्षा का हवाला देकर कोई भी जानकारी नहीं दी एडवोकेट गायत्री ने सुरक्षा का हवाला देते हुए बच्चे और खुद से संबंधित कोई अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम से कहा कि बहुत सारे दुश्मन हैं, बच्चे की सेफ्टी को लेकर चिंता रहती है। इस कारण से ना तो कोई डॉक्यूमेंट दे सकती हूं ना ही कुछ बता सकती हूं। बस हमारे सवाल पर उन्होंने स्वीकार किया है कि बच्चे के निवास और अन्य स्कूल के डॉक्युमेंट्स में पिता का नाम संजीव हंस ही है। गायत्री ने दावा किया जो ऑडियो उन्होंने हमे दिया है उसमें संजीव हंस भी स्वीकार कर रहे हैं कि मेरा बेटा उनका ही बच्चा है। गायत्री बोलीं- संजीव ने नहीं दिया मेंटिनेंस एडवोकेट गायत्री ने कहा कि वो मेंटेनेंस नहीं दे रहे हैं। 2022 में एक्सेप्ट किया कि बच्चा उन्हीं का है, इसके बाद फिर जेल चले गए तो हम भी बीच में केस नहीं की हमको लगा कि भाई खुद से बार बार क्या हर चीज के लिए केस करना भाई? लेकिन अब मेंटेनेंस का केस किया है। मैं पिछला मेंटेनेंस मांग रही हूं और आगे के लिए भी दावा की हूं। मुझे और उनके बच्चे के लिए मेंटेनेंस चाहिए। गायत्री का कहना है कि वह मेंटेनेंस नहीं दे रहे हैं। 2022 में घर खरीदने के लिए पैसा दिए, इसके बाद एक रुपया भी नहीं दिए हैं। इतनी तो इंसानियत होनी चाहिए कि हमारा परिवार कैसे चलेगा। गायत्री का कहना है कि उन्होंने 2022 और 2023 में वेट किया। साल 2024 मे संजीव जेल चले गए। गायत्री का कहना है कि कोर्ट ने फीयर्स ओल्ड रिलेशन बोला है। जो भी हुआ है, कंसेलुअल हुआ है तो मैंने मेंटेनेंस फाइल किया है। मेंटिनेंस अभी फाइल किया है, संजीव प्रॉपर्टी कोर्ट में दिखाएगा कि उसकी टोटल प्रॉपर्टी क्या है? इसके बाद कोर्ट मेंटेनेंस तय करेगा। अब ईडी के अकॉर्डिंग तो बहुत सारी प्रॉपर्टी संजीव के पास है, इस हिसाब से ही मेंटेनेंस मिलेगा। मैंने तो कोर्ट से आवेदन किया है, कोर्ट जांच करें कि उनकी कितनी प्रॉपर्टी है। मुझे तो पता नहीं भाई। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने मुझे उनका लिव इन पार्टनर माना है, हम लोग साथ में रहे हैं। रेप केस बना नहीं तो ठीक है साथ में रहे हैं, लिव इन पार्टनर में रहे हैं तब तो बच्चा हुआ है। मेंटेनेंस केस डिनाई करेंगे को DNA जांच करानी होगी मेंटेनेंस का केस अगर डिनाई करेंगे तो संजीव को डीएनए जांच करानी होगी। हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट दोनों ने लिव इन व लॉन्ग टर्म रिलेशन माना है। अब बचके कहां जाएंगे। एक्सेप्ट उनको करना है, आज करें कल करें। खुद उनको अपना और दुर्दशा करवाना होगा तो डीएनए जांच की मांग करेंगे। अगर थोड़ी भी समझदारी बची होगी तो एक्सपेप्ट कर लेंगे और मैटर को क्लोज करेंगे। नहीं तो पैसा भी लगेगा और फिर डीएनए भी प्रूफ होगा। इसके बाद फिर बताओ वही होगा ना और जो अपनी बेजती करवानी बची जो भी करवाएंगे। गायत्री का कहना है कि वह अब कॉल भी नहीं करते हैं, 10 गुंडे पाल रखे हैं, वही काल करते हैं। मैं एक पढ़ी लिखी डबल ग्रेजुएट एडवोकेट हूं, मुझसे कोई चालाकी नहीं चलेगी। मैं न्याय के लिए लड़ाई लड़ना जानती हूं, चाहे वह मेरा कुछ भी कर लें, मैं न्याय लेकर रहूंगी। महिला बोली - संजीव कोर्ट के फैसले संतुष्ट महिला एडवोकेट का कहना है कि संजीव हंस मामले में कोर्ट के फैसले से संतुष्ट है। न्यायपालिका पर उन्हें पूरा भरोसा है। महिला ने कहा कि, कोर्ट ने संजीव को बोला है कि आप लंबे रिलेशन में है, आपका बच्चा है, आप इसको मेंटेन कीजिए। संजीव के खिलाफ मेन्टेनेंस फाइल है। अभी वो राजस्व विभाग के अपर सचिव के रूप में तैनात हुए हैं। कोर्ट का आदेश है, उनको तो एक्सेप्ट करना ही पड़ेगा। न्यायालय से बढ़ कर तो कोई नहीं है। महिला ने कहा कि, 'अब उनका एविडेन्स है। उन्होंने आधार कार्ड दिया। मेरे बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए, उनकी रिकॉर्डिंग है कि हां मेरा बच्चा है, भरण-पोषण दूंगा, मैं सब कुछ करूंगा, मैं बाप हूं इसका। तो मैं संतुष्ट हूं। न्यायालय से मुझे क्या चाहिए। मुझे अपना ले, बच्चे को अपना ले, यही तो बात है।' महिला एडवोकेट का कहना है कि इस केस में 5 साल डीले हुआ है। जब केस डिले होता है तो इसका लाभ आरोपी को मिलता है। 5 साल में उसने डराया धमकाया तो हम FIR नहीं किए। कोर्ट ने कहा है कि आप लोग के बीच एक बच्चा है तो बच्चे को अपनाइए और अच्छे से रहिए, मेंटेन कीजिए आपकी ये ड्यूटी है, बाकी कुछ बात नहीं है। इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैमिली कोर्ट में मेंटनेंस का केस महिला एडवोकेट गायत्री का कहना है कि संजीव हम उसका मैटर है कि पटना हाइकोर्ट ने उनके केस को रेप केस नहीं माना। उनके ऑर्डर में लिखा है कि इनका लम्बा रिलेशन है, 5 साल का रिलेशन है, पैसे का ट्रांजैक्शन है। आपसी सहमति से इनका रिश्ता है तो हम रेप नहीं मानते हैं। गायत्री का कहना है कि मैंने इस ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया तो सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के ऑर्डर को सही माना। बोला कि नहीं, ये इन लोगों का आपसी रिलेशन है। क्योंकि लंबा समय बीता है। बच्चा बड़ा हो गया है। 5 साल के समय में संजीव हंस ने पैसे दिए हैं। इस बीच में संजीव के पैसे देने को लेकर ईडी की एंट्री हुई और वह 10 माह जेल में रहे। अभी संजीव हंस पर मैंने मेंटनेंस के लिए इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैमिली कोर्ट में केस फाइल किया हुआ है बच्चे की मेंटनेंस के लिए, जो वो नहीं दे रहे हैं। तो इसके सुनवाई का भी 9 जनवरी को डेट है। तो वो भरण पोषण देंगे, वो कोर्ट की प्रोसीडिंग के थ्रू होगा। तो संजीव हंस का मैटर यहां खत्म हुआ है कि वो रिलेशन हैं और पैसे का ट्रांजैक्शन है तो सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट ने उसको मान लिया है। संजीव से बात होने के सवाल पर महिला कहती हैं कि, संजीवन ने पैसा दिए हैं, उसके बाद उसने नंबर बंद कर दिया है। इसके बाद जो दो नंबरों से वो मुझसे बात करते थे, उसकी रिकॉर्डिंग भी है मेरे पास, जिसमें वो एक्सेप्ट कर रहे हैं कि बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट के लिए हम मिलकर बात करते हैं। हमने घर दे दिया है, पैसा दे दिया है तो ये रिकॉर्डिंग भी है। भास्कर ने इस मामले में IAS संजीव हंस का पक्ष जानने के लिए कॉल किया तो उन्होंने नहीं उठाया। हमने उनके 3 मोबाइल नंबर्स पर उनका पक्ष जानने के लिए मैसेज किया है। उनका ओर से जवाब आने पर हम उनका पक्ष भी खबर में अपडेट करेंगे।