इस रोबोट को देखने के लिए माइक्रोस्कोप की पड़ती है जरूरत! जानिए किस टेक्नोलॉजी पर करता है काम

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Smallest Robot: साइंस फिक्शन फिल्मों में दिखने वाले बेहद छोटे रोबोट अब सिर्फ कल्पना नहीं रहे. वैज्ञानिकों ने ऐसे माइक्रो रोबोट तैयार कर लिए हैं जो नमक के एक दाने से भी छोटे हैं लेकिन फिर भी सोच सकते हैं, अपने आसपास के माहौल को समझ सकते हैं और तरल पदार्थों में तैरते हुए खुद से आगे बढ़ सकते हैं. यह तकनीक रोबोटिक्स की दुनिया में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है.कितने छोटे हैं ये माइक्रो रोबोट?इन अनोखे रोबोट्स को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के शोधकर्ताओं ने मिलकर विकसित किया है. इनका आकार करीब 200×300×50 माइक्रोमीटर है यानी इंसानी बाल की मोटाई से भी कई गुना छोटा. इतने छोटे होने के बावजूद ये रोबोट तापमान में बदलाव महसूस कर सकते हैं तय रास्तों पर चल सकते हैं और महीनों तक बिना किसी बाहरी मदद के काम करते रह सकते हैं.रोशनी से चलने वाली अनोखी तकनीकइन माइक्रो रोबोट्स की सबसे खास बात यह है कि इन्हें किसी बैटरी या मोटर की जरूरत नहीं होती. ये पूरी तरह रोशनी से पावर लेते हैं. इनके अंदर मौजूद मिनिएचर सोलर सेल्स रोशनी को ऊर्जा में बदलते हैं. चलने के लिए ये पारंपरिक पहियों या पैरों का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि तरल में मौजूद आयन यानी विद्युत आवेशित कणों को हल्का सा धक्का देकर खुद को आगे बढ़ाते हैं. माइक्रो दुनिया के भौतिक नियमों के हिसाब से यही तरीका सबसे ज्यादा कारगर माना जाता है.सोचने और फैसला लेने की क्षमतापहले बनाए गए माइक्रो रोबोट्स को आमतौर पर बाहर से कंट्रोल करना पड़ता था जैसे मैग्नेटिक फील्ड या तारों की मदद से. लेकिन ये नए रोबोट पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं. इनमें सेंसिंग, कंप्यूटिंग, निर्णय लेने और मूवमेंट की क्षमता एक ही छोटे से सिस्टम में मौजूद है. ये अपने आसपास के माहौल के अनुसार खुद फैसला ले सकते हैं और बिना किसी इंसानी निर्देश के काम कर सकते हैं.आपस में संवाद भी कर सकते हैंये माइक्रो रोबोट माइक्रोस्कोप के नीचे दिखने वाले खास पैटर्न बनाकर आपस में संकेतों के जरिए संवाद भी कर सकते हैं. इसका मतलब है कि भविष्य में ये रोबोट टीम बनाकर किसी काम को अंजाम दे सकते हैं, वो भी बिना किसी बाहरी कंट्रोल सिस्टम के.भविष्य में कहां होगा इस्तेमाल?इन रोबोट्स का इस्तेमाल मेडिकल और वैज्ञानिक रिसर्च में क्रांतिकारी साबित हो सकता है. ये कोशिकाओं के स्तर पर जैविक प्रक्रियाओं की निगरानी कर सकते हैं, मेडिकल जांच में मदद कर सकते हैं या बेहद छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस असेंबल करने में काम आ सकते हैं. चूंकि इन्हें बड़े पैमाने पर बेहद कम लागत में बनाया जा सकता है, इसलिए रिसर्च और इंजीनियरिंग के लिए नए दरवाजे खुलते हैं.यह भी पढ़ें:एक बटन दबा और देश हुआ ऑफलाइन! सरकारें कैसे मिनटों में रोक देती हैं पूरी इंटरनेट कनेक्टिविटी?