आज की महिलाएं अपनी जिंदगी की प्लानिंग कैलेंडर और डेडलाइंस के हिसाब से कर रही हैं। कब पढ़ाई पूरी होगी, कब करियर सेट होगा, कब आर्थिक स्थिरता आएगी। लेकिन शरीर का बायलॉजिकल कैलेंडर इन योजनाओं से अलग चलता है। यहीं से शुरू होता है वो टकराव, जहां मन कहता है “अभी नहीं” और बॉडी चुपचाप समय गिनती रहती है। इसी गैप में एक मेडिकल ऑप्शन का सामने आया है–एग फ्रीजिंग। इसे “फर्टिलिटी का पॉज बटन” भी कहा जाता है, जिसे महिलाएं अब ज्यादा आत्मविश्वास से दबा रही हैं। पिछले एक दशक में दुनिया भर में एग फ्रीजिंग के मामलों में करीब 60% फ्रिजिंग की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमेरिका में यह ट्रेंड और तेज है, जहां हर साल एग फ्रीजिंग साइकल्स में औसतन 20% की वृद्धि देखी जा रही है। भारत में भी तस्वीर तेजी से बदल रही है। फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक, मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में पिछले पांच सालों में एग फ्रीजिंग को लेकर पूछताछ में पांच गुना तक इजाफा हुआ है। दिल्ली के बड़े फर्टिलिटी सेंटर्स में जहां पहले साल में एक-दो महिलाएं ही यह ऑप्शन चुनती थीं, अब हर महीने 5 से 6 महिलाएं एग फ्रीजिंग करा रही हैं। ऐसे में आज हम फिजिकल हेल्थ में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. गीता जैन, HOD, ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड आईवीएफ, मैक्योर हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल– एग फ्रीजिंग क्या होती है? जवाब– एग फ्रीजिंग एक मेडिकल प्रोसेस है। इसमें महिला के अंडों को शरीर से निकाल लिया जाता है। इन अंडों को बहुत कम तापमान पर फ्रीज किया जाता है, ताकि भविष्य में उनका इस्तेमाल किया जा सके। इसका मकसद अंडों की मौजूदा क्वालिटी को सुरक्षित रखना होता है जिससे उम्र बढ़ने का असर उन पर न पड़े। जब महिला मानसिक, शारीरिक या सामाजिक रूप से तैयार हो, तब वह उन्हीं अंडों से गर्भधारण कर सके। सवाल– महिलाएं एग फ्रीजिंग क्यों कराती हैं? जवाब– एग फ्रीजिंग इसलिए कराई जाती है ताकि महिलाएं अपनी फर्टिलिटी को भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकें। कई महिलाएं करियर बनाना चाहती हैं, आर्थिक रूप से स्थिर होना चाहती हैं, देर से शादी प्लान करती हैं या किसी मेडिकल कारण से फिलहाल प्रेग्नेंसी टालना चाहती हैं। सवाल– एग फ्रीजिंग कितनी सेफ है? जवाब– एग फ्रीजिंग को मेडिकल भाषा में ओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन कहा जाता है। अनुभवी फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट की देखरेख में यह प्रक्रिया आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है। आज इस्तेमाल होने वाली तकनीकें पहले के मुकाबले ज्यादा एडवांस और भरोसेमंद हैं, जिससे अंडों को फ्रीज करने की सफलता दर बेहतर हुई है। सवाल– एग फ्रीज कराने की आइडियल उम्र क्या होती है? जवाब– विशेषज्ञों के मुताबिक, 35 साल से पहले एग फ्रीज कराना बेहतर माना जाता है। इस उम्र तक अंडों की क्वालिटी अच्छी होती है। हालांकि महिला की सेहत, जेनेटिक फैक्टर्स और हॉर्मोनल स्थिति भी मायने रखती है। एक स्टडी में पाया गया है कि 37 साल से पहले एग फ्रीजिंग का फायदा सबसे ज्यादा होता है। यह ज्यादा कॉस्ट-इफेक्टिव भी होती है। सवाल– एग फ्रीज कराने का खर्च कितना आता है? जवाब– एक सिंगल साइकिल का खर्च लगभग 1 लाख से 2.5 लाख रुपये के बीच हो सकता है। यह इस्तेमाल की गई दवाओं, महिला के ओवेरियन रिजर्व और क्लिनिक या शहर पर निर्भर करता है। इसके अलावा अंडों को स्टोर करने का सालाना चार्ज अलग से लिया जाता है, जो आमतौर पर क्लिनिक-टू-क्लिनिक अलग होता है। सवाल– क्या एग फ्रीज कराने के साइड इफेक्ट होते हैं? जवाब– एग फ्रीजिंग के साइड इफेक्ट ज्यादातर अस्थायी और हॉर्मोन से जुड़े होते हैं। हॉर्मोनल दवाओं के कारण ब्लोटिंग, मूड स्विंग्स, सिरदर्द, थकान, ब्रेस्ट टेंडरनेस हो सकती है। एग रिट्रीवल के बाद हल्का दर्द या स्पॉटिंग भी हो सकती है। गंभीर लेकिन दुर्लभ मामलों में ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम या बहुत ही कम मामलों में ओवेरियन टॉर्शन का खतरा होता है। सवाल– एग फ्रीजिंग से पैदा हुए बच्चे कितने हेल्दी होते हैं? जवाब– एग फ्रीजिंग से जन्मे बच्चे आम तौर पर पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य होते हैं। रिसर्च बताती है कि ऐसे बच्चों में नेचुरल कंसेप्शन या फ्रेश IVF से जन्मे बच्चों की तुलना में कोई ज्यादा स्वास्थ्य जोखिम नहीं पाया गया है, खासकर तब जब अंडे कम उम्र में फ्रीज किए गए हों। सवाल– एग फ्रीज करने से पहले क्या अंडों की क्वालिटी चेक की जाती है? जवाब– हां, एग फ्रीजिंग से पहले डॉक्टर महिला के ओवेरियन रिजर्व और अंडों की संभावित गुणवत्ता का आकलन करते हैं। इसके लिए ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और कुछ हॉर्मोनल टेस्ट किए जाते हैं, ताकि यह समझा जा सके कि एग फ्रीजिंग से महिला को कितना फायदा मिल सकता है। सवाल– अगर एग फ्रीज करा लिए और बाद में बच्चा न चाहें तो क्या होता है? जवाब– अगर महिला भविष्य में यह तय करती है कि वह बच्चे नहीं चाहती तो फ्रीज किए गए अंडों को डिस्कार्ड किया जा सकता है। यह प्रक्रिया मेडिकल और कानूनी गाइडलाइंस के तहत होती है। कुछ मामलों में अंडों को रिसर्च के लिए डोनेट भी किया जा सकता है। यह फैसला पूरी तरह महिला की सहमति पर निर्भर करता है। साथ ही, इसमें स्थानीय नियमों और कानूनों का पालन किया जाता है। सवाल– अगर एग फ्रीज कराएं लेकिन कंसीव न हो पाए तो क्या विकल्प होते हैं? जवाब– ऐसी स्थिति में सबसे पहले फ्रीज किए गए अंडों को थॉ (पिघलाना) किया जाता है और पार्टनर या डोनर स्पर्म से IVF के जरिए फर्टिलाइज कर भ्रूण तैयार किया जाता है। अगर महिला का गर्भाशय स्वस्थ है, तो भ्रूण उसी के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। यदि मेडिकल कारणों से महिला खुद कंसीव नहीं कर सकती, तो उसी भ्रूण को सरोगेट मदर के गर्भ में ट्रांसफर किया जा सकता है। यह समझना जरूरी है कि एग फ्रीजिंग प्रेग्नेंसी की गारंटी नहीं है। सवाल– क्या एग फ्रीज कराकर सरोगेसी से बच्चे पैदा किए जा रहे हैं? जवाब– हां, कुछ मामलों में महिलाएं एग फ्रीज कराकर बाद में सरोगेसी के जरिए मां बन रही हैं, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी या सामान्य रास्ता नहीं है। जब महिला की सेहत प्रेग्नेंसी के लिए सुरक्षित न हो, बार-बार IVF फेल हुआ हो या कैंसर जैसे इलाज के कारण खुद गर्भधारण संभव न हो, तब सरोगेसी एक ऑप्शन बनता है। सवाल– वो कौन से लाइफस्टाइल फैक्टर्स हैं, जो एग की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं? जवाब– कई लाइफस्टाइल फैक्टर्स एग की क्वालिटी पर सीधा असर डालते हैं। ग्राफिक्स से समझते हैं- सवाल– एग क्वालिटी बेहतर करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें? जवाब– एग की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए स्मोकिंग और शराब से बचना जरूरी है। स्ट्रेस मैनेजमेंट, संतुलित और पोषण-युक्त आहार, हेल्दी BMI बनाए रखना और शरीर में ब्लड फ्लो बेहतर रखना फर्टिलिटी के लिए फायदेमंद माना जाता है। सही खान-पान और एक्टिव लाइफस्टाइल से हॉर्मोनल बैलेंस बेहतर होता है, जिससे अंडों की सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एग फ्रीजिंग से जुड़े कॉमन सवाल–जवाब सवाल- क्या एग फ्रीजिंग सभी महिलाओं के लिए जरूरी है? जवाब- नहीं, यह एक पर्सनल और मेडिकल फैसला है। सवाल- क्या एक बार एग फ्रीज कराना प्रेग्नेंसी की गारंटी होती है? जवाब- नहीं, यह सिर्फ संभावना बढ़ाने का तरीका है। सवाल- क्या उम्र ज्यादा होने पर एग फ्रीजिंग बेकार है? जवाब- नहीं, लेकिन कम उम्र में फायदा ज्यादा होता है। एग फ्रीजिंग डर या जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सही जानकारी और सोच-समझ के साथ लिया गया फैसला होना चाहिए। यह भविष्य को कंट्रोल करने का तरीका नहीं, बल्कि विकल्पों को खुला रखने की एक मेडिकल सुविधा है। सही समय पर ही इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। ............................ ये खबर भी पढ़िए... फिजिकल हेल्थ- फास्टफूड खाने से लड़की की मौत:जंक फूड से ब्रेन, लिवर होता डैमेज, फाइबर वाले फल-सब्जी खाएं, हेल्दी रहे यूपी के अमरोहा में 11वीं की छात्रा की ज्यादा फास्टफूड खाने से मौत हो गई। दिल्ली AIIMS में उसका इलाज चल रहा था। डॉक्टर ने बताया कि ज्यादा फास्टफूड खाने से लड़की की आंतें आपस में चिपक गई थीं। पाचन तंत्र पूरी तरह से डैमेज हो गया था। पूरी खबर पढ़िए...