वर्ष 1877 से 1879 के बीच किशोर नरेंद्रनाथ ने अपने जीवन के लगभग दो महत्वपूर्ण वर्ष इसी शहर में बिताए थे, जिसने उनके भविष्य के आध्यात्मिक चिंतन की नींव रखी। आइए चलते हैं तो रायपुर की यात्रा पर, जहां उनके विचारों को आगे बढ़ाया जा रहा है।