अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए प्लान बनाने का निर्देश दिया है। डेली मेल के मुताबिक ट्रम्प ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) को यह जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि सैन्य अधिकारी इस विचार से सहमत नहीं दिख रहे हैं। वे इसे कानूनी रूप से गलत मानते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प की यह रुचि घरेलू राजनीति से भी जुड़ी हो सकती है। इस साल के अंत में मिड-टर्म चुनाव होने वाले हैं और रिपब्लिकन ससंद पर नियंत्रण खोने से डर रहे हैं। इसलिए ट्रम्प कोई बड़ा कदम उठाकर लोगों का अर्थव्यवस्था की समस्याओं से ध्यान हटाना चाहते हैं। डेली मेल को एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि, 'जनरलों को लगता है कि ट्रम्प की ग्रीनलैंड योजना बेतुकी और गैरकानूनी है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति की जिद एक पांच साल के बच्चे से निपटने जैसा है।' रिपोर्ट- यूरोपीय देशों को NATO छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे ट्रम्प अमेरिका ने अगर ग्रीनलैंड पर हमला किया तो इससे NATO के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। साथ ही यूरोपीय नेताओं के साथ सीधा टकराव हो सकता है, जिससे NATO गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच सकता है। कुछ यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि ट्रम्प के आसपास के कट्टरपंथी MAGA गुट का असली मकसद नाटो को अंदर से खत्म करना है, क्योंकि संसद उन्हें NATO से बाहर निकलने की इजाजत नहीं देगी। इसलिए ग्रीनलैंड पर कब्जा करके यूरोपीय देशों को NATO छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ट्रम्प नाटो को खत्म करना चाहते हैं, तो यह शायद सबसे आसान तरीका हो सकता है।' ट्रम्प NATO को क्यों कमजोर करना या तोड़ना चाहते हैं? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प लंबे समय से NATO को अनुचित मानते हैं। उनका मानना है कि अमेरिका इसमें सबसे ज्यादा पैसा और संसाधन खर्च करता है, जबकि यूरोपीय देश अपने जीडीपी का 2% रक्षा पर खर्च करने के लक्ष्य को पूरा नहीं करते। पहले कार्यकाल में, उन्होंने NATO सहयोगियों से भुगतान बढ़ाने की मांग की और कहा कि अगर वे नहीं मानेंगे तो अमेरिका उनकी रक्षा नहीं करेगा। 2024 चुनाव अभियान में, ट्रम्प ने कहा कि वे रूस को उन NATO सदस्यों पर जो चाहे करने की अनुमति देंगे जो पर्याप्त खर्च नहीं करते। ट्रम्प का मकसद "अमेरिका फर्स्ट" नीति को बढ़ावा देना है। जिसमें वे अमेरिकी करदाताओं के पैसे को विदेशी सुरक्षा पर कम खर्च करना चाहते हैं। साथ ही यूरोप को अपनी रक्षा खुद करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प NATO को कमजोर करके रूस के साथ बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं। ट्रम्प के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा था कि वे NATO से अमेरिका को निकालने की कोशिश करेंगे। वे इसे पुराना और अमेरिका के लिए बोझ मानते हैं। हालांकि, कई विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इससे अमेरिका अलग-थलग पड़ सकता है। यूरोप रूस के प्रभाव में आ सकता है और वैश्विक सुरक्षा कमजोर हो सकती है। ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं किया तो रूस-चीन यहां आ जाएंगे इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार को बताया था कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड पर कब्जा करना क्यों जरूरी है। उन्होंने व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के बड़े अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक के दौरान कहा कि अगर अमेरिका ने ऐसा नहीं किया तो रूस और चीन जैसे देश इस पर कब्जा कर लेंगे। ट्रम्प ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करना जमीन खरीदने का मसला नहीं है, यह रूस और चीन को दूर रखने से जुड़ा है। हम ऐसे देशों को अपना पड़ोसी बनते देख नहीं सकते। ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड से आसान तरीके से सौदा चाहता हूं ट्रम्प ने आगे कहा, अमेरिका अगर ग्रीनलैंड को आसान तरीके से हासिल नहीं कर पाया, तो दूसरे सख्त तरीके अपनाने होंगे। उन्होंने कहा, ‘हम ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कुछ न कुछ करेंगे, चाहे उन्हें पसंद हो या न हो।’ उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मैं चाहता हूं कि सौदा आसान तरीके से हो जाए।’ हालांकि, उन्होंने डेनमार्क के प्रति अपनी नरमी भी जताई और कहा, ‘वैसे मैं डेनमार्क का बहुत बड़ा फैन हूं। वे मेरे साथ बहुत अच्छे रहे हैं।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ग्रीनलैंड के लोगों को सीधे पैसे देकर उन्हें अमेरिका के साथ जुड़ने के लिए राजी करने की योजना बना रहा है। इसपर ट्रम्प ने कहा, ‘अभी मैं ग्रीनलैंड के लिए पैसे की बात नहीं कर रहा हूं। हो सकता है बाद में करूं।’ ट्रम्प ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। ग्रीनलैंड के पास रूसी और चीनी गतिविधियां बढ़ी ट्रम्प ने ग्रीनलैंड के पास रूसी और चीनी नौसेना की बढ़ती गतिविधियों का हवाला दिया, जिसमें डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियां शामिल हैं। ट्रम्प ने जोर देकर कहा, "हम रूस या चीन को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने नहीं देंगे।" उन्होंने कहा कि वे चीन और रूस दोनों को पसंद करते हैं। उनके नेताओं व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन वह उन्हें ग्रीनलैंड नहीं दे सकते। ट्रम्प बोले- मालिक बनकर बेहतर तरीके से रक्षा करेंगे जब ट्रम्प से पूछा गया कि अमेरिका का पहले से ही वहां सैन्य अड्डा है, तो पूरे कब्जे की क्या जरूरत है। इसपर ट्रम्प ने जवाब दिया कि लीज काफी नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘जब हम मालिक होते हैं, तो हम इसकी रक्षा करते हैं। लीज की रक्षा उतनी नहीं की जाती। हमें पूरा मालिकाना हक चाहिए।’ ट्रम्प ने पुरानी कूटनीति की आलोचना भी की । उन्होंने कहा कि देश 100 साल के सौदे नहीं कर सकते, बल्कि मालिकाना हक से ही रक्षा होती है। ट्रम्प 2019 से ही यह कहते आ रहे हैं कि वह डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को खरीदना चाहते हैं, जबकि अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो सैन्य गठबंधन के सदस्य हैं। अगर ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो इसका मतलब होगा कि अमेरिका नाटो के ही सदस्य देशों के खिलाफ खड़ा हो जाएगा। डेनमार्क ने हमले की धमकी दी थी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी के बीच डेनमार्क ने जवाब दिया था। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने धमकी दी थी कि अगर कोई विदेशी ताकत उनके इलाके पर हमला करती है, तो सैनिक आदेश का इंतजार किए बिना तुरंत जवाबी कार्रवाई करेंगे और गोली चलाएंगे। बिना आदेश हमला करने का नियम 1952 का है। तब डेनमार्क ने अपनी सेना के लिए एक नियम बनाया था, जिसके मुताबिक विदेशी ताकतों के देश पर हमला करने की स्थिति में सैनिकों को तुरंत लड़ना होगा। इसके लिए उन्हें किसी सीनियर अधिकारी की इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती। ग्रीनलैंड PM बोले थे- हमारा देश बिकाऊ नहीं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रीनलैंड को वेनेजुएला से जोड़कर सैन्य हस्तक्षेप की बात करते हैं, तो यह न केवल गलत है बल्कि हमारे लोगों के प्रति अनादर है। नीलसन ने 4 जनवरी को बयान जारी कर कहा- मैं शुरू से ही शांत और स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता हूं कि घबराहट या चिंता का कोई कारण नहीं है। केटी मिलर के पोस्ट से, जिसमें ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे में लिपटा हुआ दिखाया गया है, इससे कुछ भी नहीं बदलता। जानिए ग्रीनलैंड से अमेरिका को क्या फायदा