काले रंग की मूर्ति, राजा का दरबार और सीता का कुंआ, भारत के 4 मंदिर जिनकी कहानी बेहद दिलचस्प!

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Lord Rama Famous Temple: भारत एक ऐसा विशाल देश,जहां असंख्य देवी-देवताओं के मंदिर हैं. वास्तव में देखा जाए तो हमारे देश के लगभग प्रत्येक कोने में किसी न किसी देवी-देवताओं के मंदिर देखने को मिलते हैं. हालांकि भारत के करोड़ों हिंदूओं के हृदय में भगवान राम का स्थान परम-पूजनीय है.भगवान राम जिन्हें भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है. महर्षि वाल्मिकी के महाकाव्य रामायण के नायक होने के नाते भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है. अयोध्या के राम मंदिर के अलावा भी भारत के कुछ ऐसे प्रसिद्ध राम मंदिर हैं, जहां हर किसी को अपने जीवन में एक न एक बार दर्शन जरूर करने चाहिए.भद्राचलम का सीता राम चंद्रस्वामी मंदिरदक्षिण भारत के तेलंगाना के भद्राचलम में गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर काफी पूजनीय है. मंदिर में भगवान राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण की मूर्तियां विराजमान हैं. तीन ही देवताओं की उपस्थिति मंदिर में आने वाले भक्तों की आत्मा को शुद्ध करने के साथ सकारात्मक वातावरण का माहौल उत्पन्न करती है.मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यदि आप अपने परिवार के साथ इस मंदिर में आते हैं और सच्ची श्रद्धा के साथ भगवान से प्रार्थना करते हैं, तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है.भद्राचलम का यह स्थान आध्यात्मिक नजरिए से इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां भगवान राम अपने वनवास काल के दौरान आए थे. मंदिर में रामनवमी जैसे खास उत्सवों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है. मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि, भगवान की दिव्य ऊर्जा आज भी मंदिर परिसर में अनुभव की जा सकती है. नासिक महाराष्ट्र में स्थित कालाराम मंदिरनासिक महाराष्ट्र में स्थित कालाराम मंदिर, जिसे आध्यात्मिक गुरु और भगवान राम के सबसे सच्चे भक्तों में से एक सरदार रंगराज ओढेकर ने बनवाया था. माना जाता है कि, इस मंदिर में दर्शन करने से परिवार में मेल-जोल, मन की शांति, मुश्किल समय की समाप्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है.इस मंदिर की सबसे खूबसूरती ये है कि, यहां भगवान राम की मूर्ति का रंग काला है, जिसे स्थानी लोग कालाराम कहते हैं. भगवान राम की इस मूर्ति की ऊंचाई 7 फीट है जो काले पत्थर से ही बनाई गई है. इसके अलावा मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्ति भगवान की पूजा करने से पहले पवित्र गोदावरी नदी में डुबकी लगाते हैं. इसके पीछे लोक मान्यताएं हैं कि,  भगवान राम अपने वनवास के दौरान इसी नदी में स्नान करते थे. यह मंदिर उस स्थान पर बनाया गया है, जहां भगवान राम अपने वनवास के दौरान रहे थे. इसका निर्माण 1782 में सरदार रंगराव ओढेकर ने एक पुरानी लकड़ी के स्थान पर करवाया था. लोगों का मानना है कि, भगवान राम की इस प्रतिमा को बनाने में 12 साल का समय लगा और रोजाना 2000 लोग कार्यरत थे.मध्य प्रदेश ओरछा का श्रीराम राजा का मंदिरमध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित श्रीराम राजा का मंदिर बेहद ही पवित्र जगह के तौर पर खास महत्व रखता है. स्थानीय लोग भगवान राम को राजा के रूप में पूजते हैं और उन्हें प्रेम और सम्मान से राम राजा कहा जाता है, जिसका अर्थ है ओरछा का शासक.इसके अलावा उन्हें प्रति दिन पुलिस द्वारा रॉयल गार्ड ऑफ ऑनर भी देते हैं. इस जगह के इतिहास को देखा जाए तो असल में यह एक शाही महल था, जिसे 16वीं सदी के आखिर में बुंदेला वंश के राजा मधुकर शाह ने बनवाया था. कहानियों के मुताबिक, रानी गणेश कुंवर अयोध्या से भगवान राम की मूर्ति ला रही थीं और भगवान के आदेश के कारण समूह आगे नहीं बढ़ पाया.इसलिए यहां तप किया गया कि, इस महल को मंदिर में परिवर्तन कर दिया जाएगा. भारत वर्ष से हजारों की संख्या में भक्त इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं.पंजाब अमृतस श्रीराम तीरथ मंदिरपंजाब के अमृतसर स्थित श्रीराम तीरथ मंदिर आध्यात्म के नजरिए से बेहद खास है. धार्मिक गुरुओं का कहना है कि, यह मंदिर एक समय पर वह आश्रम हुआ करता था, जहां वाल्मिकी ने रामायण लिखी थी. इसके अलावा माना जाता है कि, लव-कुश का जन्म स्थान भी यही था. मंदिर के नजदीक में ही एक पुराना कुंआ हैं, माना जाता है कि, सीता देवी रोज अपना काम यहीं करती थीं. भक्तों को पक्का विश्वास है कि, इस पवित्र मंदिर में भगवान राम की पूजा करने से बच्चों को आशीर्वाद, आध्यात्मिक और भौतिक खुशहाली की प्राप्ति होती है.Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.