Planetary doshas: ग्रह दोष क्या होते हैं? जानिए जीवन पर इनका असर और ज्योतिष में बताए गए उपाय!

Wait 5 sec.

Planetary doshas: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल और स्थिति का हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है. जब ये खगोलीय पिंड जन्म कुंडली में विपरीत स्थिति में होते हैं, तो वे असंतुलन पैदा कर सतते हैं, जिन्हें आमतौर ग्रह दोष के नाम से जाना जाता है.माना जाता है कि ये दोष सामंजस्य को बिगाड़ते हैं, जिसकी वजह से स्वास्थ्य, रिश्ते, करियर और आर्थिक जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. 2026 Real Estate: क्या Gen Z कभी अपना घर खरीद पाएगा? जानें शनि की चाल और मार्केट का कड़वा सचग्रहों के अलग-अलग तरह के दोषों को समझना और उनके असर को कम करने के तरीके जानना व्यक्तियों को बाधाओं से दूर करने के साथ संतुष्टपूर्ण जीवन जीने में मदद कर सकता है. ग्रहीय दोष क्या होता है?कुंडली में राहु, केतु, शनि, मंगल या अन्य ग्रहों की खास स्थिति या संयोजन होने पर ग्रहीय दोष उत्पन्न होते हैं. ये दोष असंतुलन पैदा करते हैं, जो व्यक्ति के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. ग्रहों के दोषों के प्रकारमंगल दोष तब लगता है , जब कुंडली में मंगल चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है. प्रभाव- इससे वैवाहिक जीवन में चुनौतियों उत्पन्न होने के साथ गलतफहमियां दूर होती हैं. इससे आर्थिक स्थिरता भी आ सकती है. उपायमंगल शांति पाठ करें. नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए. दोष को बेअसर करने के लिए किसी अन्य मांगलिक से शादी करें. शनि दोषशनि दोष तब लगता है, जब व्यक्ति पर उनके अशुभ प्रभाव हो. खासकर साढ़ेसाती या ढैय्या की अवधि के दौरान.प्रभाव- शनि दोष के कारण रिश्तों में तनाव और स्वास्थ्य में समस्या आ सकती हैं.उपायशनिवार के दिन शनि मंदिर में काले तिल या सरसों का तेल अर्पण करें. शनि मंत्र "ओम शं शनिचराय नमः" का जाप करें. राहु-केतु दोषराहु-केतु दोष तब लगता है जब कुंडली में राहु और केतु प्रतिकूल स्थिति में हो या अशुभ ग्रह के साथ युति में हों. प्रभाव- राहु-केतु दोष के कारण भ्रम, नुकसान, मानसिक तनाव और व्यक्तिगत विकास में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. उपाय राहु-केतु शांति पूजा कराए. ज्योतिषी से परामर्श लेने के बाद गोमेद या केतु के लिए कैट्स आई जैसे रत्न पहनें. नियमित रूप से राहु-केतु से जुड़े मंत्रों का जाप करें. काल सर्प दोषकाल सर्प दोष तब लगता है, जब जन्म कुंडली में सभी ग्रह रागु-केतु के बीच में स्थिति हो.प्रभाव- काल सर्प दोष के कारण जीवन में देरी, संघर्ष और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. उपाय त्र्यंबकेश्वर या अन्य पवित्र मंदिरों में काल सर्प दोष निवारण की पूजा करें. भगवान शिव की पूजा करने के साथ शिवलिंग पर दूध अर्पित करें. रोजाना महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. पितृ दोषयह पूर्वजों के उन कर्मों की वजह से होता है, जिसका निपटारा नहीं हुआ है. प्रभाव- इससे करियर, वित्तीय और पारिवारिक संबंधों में समस्या का सामना करना पड़ सकता है. उपायपितृ पक्ष के दौरान पितृ दोष पूजा या श्राद्ध का अनुष्ठान करें.ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ पूर्वजों के नाम पर जरूरतमंदों को भोजन कराए.ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्रों का जाप करें. गुरु चांडाल दोषयह तब होता है, जब कुंडली में बृहस्पति (गुरु) राहु या केतु के साथ युति में होता है. प्रभाव- इससे बुद्धि क्षय होने के साथ आर्थिक अस्थिरता और फैसले लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. उपाय गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ उन्हें पीले फूल अर्पण करें. पीले कपड़े, हल्दी या केले का दान करें. गुरु मंत्र "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का जाप करें.बुधवार विशेष: गणेश पूजा से मजबूत होगा बुध, बिजनेस में मिलेगी बड़ी सफलताDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.