लोक कथानक व किवदंतियों में मिले प्रमाण बताते हैं कि उज्जयिनी के सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को परास्त करने के बाद पृथ्वी के अवतरण दिवस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर राज्योत्सव मनाने की परंपरा शुरू की।