सेहत का विज्ञान- 17% भारतीय किशोरों में ईटिंग डिसऑर्डर:कम खाना या शरीर को लेकर चिंता, बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर के संकेत

Wait 5 sec.

अगर आपका बच्चा खाना खाने से बचता है, कम खाता है, खाने को लेकर डर या घबराहट महसूस करता है तो इसे नजरअंदाज न करें। यह ईटिंग डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकता है। लंबे समय तक रहने पर यह कमजोरी, हार्मोनल असंतुलन, दिल, पाचन, हड्डियों और इम्यूनिटी पर भी प्रभाव डाल सकता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन, अमेरिका की रिसर्च के मुताबिक भारत में लगभग 17.2% किशोरों में ईटिंग डिसऑर्डर का जोखिम पाया गया। खासकर तनाव, सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल और बॉडी इमेज को लेकर चिंता इसे बढ़ाते हैं। इसलिए माता‑पिता को बच्चों की खाने की आदतों और व्यवहार पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। बच्चों में इसके लक्षण हर बार खाना न पसंद करना ईटिंग डिसऑर्डर नहीं होता। चिंता तब है, जब यह व्यवहार लगातार रहे और वजन, हाइट, ग्रोथ, ऊर्जा या मूड पर असर दिखे। अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन के अनुसार बच्चों में कुछ संकेत ऐसे हो सकते हैं, जिन पर माता-पिता को ध्यान देना चाहिए: अगर बच्चा बहुत कमजोर दिखे, बेहोशी, चक्कर आए, दिल की धड़कन अनियमित हो, या खाना लगभग बंद कर दे तो तुरंत डॉक्टर/इमरजेंसी में दिखाएं। समय पर पहचान और सही इलाज जरूरी बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर का इलाज आमतौर पर डॉक्टर, थेरेपिस्ट और डाइटीशियन की टीम मिलकर करती है। अक्सर फैमिली-बेस्ड ट्रीटमेंट (FBT) दिया जाता है, जिसमें माता-पिता बच्चे की खाने की आदतें सुधारने और उसे दोबारा स्वस्थ वजन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। कुछ मामलों में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) भी दी जाती है, जिससे बच्चे की खाने और बॉडी-इमेज से जुड़ी गलत सोच को बदला जा सके। साथ ही डॉक्टर नियमित चेक-अप, ब्लड टेस्ट और शरीर की स्थिति पर नजर रखते हैं। जरूरत पड़ने पर डाइटीशियन माता-पिता को संतुलित और पौष्टिक आहार की सही योजना बनाने में मदद करते हैं। समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चे पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। रेणु रखेजा जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट एवं हेल्थ कोच हैं। @consciouslivingtips