दलित IAS रिंकू सिंह का इस्तीफा, कहा- "सैलरी मिली लेकिन सार्थक जिम्मेदारी नहीं"

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2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सेवा से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें लंबे समय से कोई पोस्टिंग या सार्थक जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी और उन्हें सिर्फ “अटैच” करके रखा गया था.राही ने अपने इस्तीफे को नैतिक फैसला बताते हुए कहा कि बिना काम किए वेतन लेना उनकी नजर में गलत है. उनके मुताबिक, व्यवस्था में ईमानदार अधिकारियों के लिए यह एक तरह की सजा है कि उन्हें काम ही नहीं दिया जाता.पोस्टिंग न मिलने पर उठाए सवालराही का कहना है कि उन्हें वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनता की सेवा का मौका नहीं दिया जा रहा था. उन्होंने इसे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला बताया और कहा कि ऐसी स्थिति में ईमानदारी के मूल्यों पर समझौता होता है. विवाद के बाद बदला घटनाक्रमजुलाई 2025 में शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान एक घटना के बाद उनका मामला चर्चा में आया. बताया गया कि निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति को परिसर में खुले में पेशाब करते देखकर उन्होंने उसे सजा के तौर पर उठक-बैठक करने को कहा.इस पर वकीलों ने विरोध जताया और परिसर में खराब शौचालय व्यवस्था की समस्या उठाई. इसके बाद राही ने जिम्मेदारी लेते हुए खुद भी कान पकड़कर उठक-बैठक की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.घटना के बाद प्रशासन ने उनसे रिपोर्ट मांगी और उन्हें SDM पद से हटाकर लखनऊ स्थित राजस्व बोर्ड में अटैच कर दिया गया.36 घंटे में हटाए गए थे पद सेरिंकू सिंह राही को 28 जुलाई 2025 को शाहजहांपुर के पुवायां में SDM बनाया गया था, लेकिन महज 36 घंटे के भीतर ही उन्हें पद से हटा दिया गया था.पहले भी उजागर कर चुके हैं भ्रष्टाचारIAS बनने से पहले राही PCS अधिकारी रह चुके हैं. वर्ष 2008 में उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं में भ्रष्टाचार का खुलासा किया था. इसके बाद 2009 में उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें कई गोलियां लगीं और वे गंभीर रूप से घायल हुए.UPSC में दिव्यांग कोटा से चयनगंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 2021 में UPSC परीक्षा पास कर IAS बने. 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला.रिंकू सिंह राही का इस्तीफा प्रशासनिक सिस्टम में जवाबदेही, पोस्टिंग प्रक्रिया और ईमानदार अधिकारियों के साथ व्यवहार जैसे मुद्दों पर नई बहस खड़ी कर रहा है.