इस 37 सालों के इतिहास में 373 जवानों ने अपनी कुर्बानी दी, 547 जवान घायल हुए है। साथ ही 388 ग्रामीण भी मारे गए हैं। माओवादियों और जवानों के बीच अंतिम मुठभेड़ 30 मार्च 2026 को हुई जिसमें एक माओवादी मारा गया।