केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए प्रदेश के बजट में 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, लेकिन अब तक मात्र 17 हजार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। राशि देर से मिलने से योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है और कई योजनाओं का बजट लैप्स होने का खतरा बना हुआ है।