आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने खाने-पीने का ठीक से ध्यान नहीं रख पाते हैं. काम, मोबाइल और तनाव के बीच सबसे जरूरी चीज पानी पीना हम अक्सर भूल जाते हैं. कई लोग दिन भर में सिर्फ 2 से 3 गिलास पानी पीकर ही काम चला लेते हैं. क्या आप जानते हैं कि पानी की कमी आपके शरीर में एक गंभीर बीमारी को जन्म दे सकती है, जिसे गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) कहते हैं.किडनी स्टोन एक ऐसी समस्या है जिसमें अचानक पेट, कमर या पीठ में बहुत तेज और असहनीय दर्द उठता है. यह दर्द इतना ज्यादा हो सकता है कि व्यक्ति को अस्पताल तक जाना पड़ जाए. कई मामलों में पेशाब में खून आना, उल्टी, बुखार और जलन जैसी परेशानियां भी होने लगती हैं. इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह कम पानी पीना और शरीर में पानी की कमी यानी निर्जलीकरण (Dehydration) है. पानी की कमी से किडनी स्टोन कैसे बनता है?जब हम पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा कम हो जाती है. इसका सीधा असर हमारे पेशाब पर पड़ता है. कम पानी पीने से पेशाब गाढ़ा हो जाता है. गाढ़े मूत्र में कैल्शियम, ऑक्सालेट और यूरिक एसिड जैसे तत्व ज्यादा मात्रा में जमा हो जाते हैं. ये तत्व आपस में मिलकर छोटे-छोटे क्रिस्टल बना लेते हैं. यही क्रिस्टल धीरे-धीरे गुर्दे की पथरी में बदल जाते हैं. अगर लंबे समय तक पानी की कमी बनी रहे, तो शरीर इन क्रिस्टलों को न तो घोल पाता है और न ही बाहर निकाल पाता है. किडनी स्टोन क्या होता है?किडनी स्टोन ठोस कण या पत्थर जैसी संरचना होती है, जो गुर्दे के अंदर बनती है. यह रेत के दाने जितनी छोटी या कभी-कभी गोल्फ बॉल जितनी बड़ी भी हो सकती है. छोटी पथरी कई बार बिना किसी लक्षण के पेशाब के साथ निकल जाती है, लेकिन बड़ी पथरी मूत्र नली में फंस जाती है, जिससे भयानक दर्द होता है. किडनी स्टोन के मुख्य लक्षणकिडनी स्टोन होने पर कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं. जैसे अचानक कमर, पीठ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, दर्द का जांघ या कमर तक फैलना, पेशाब में जलन या दर्द, पेशाब में खून आना, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, मतली और उल्टी, बुखार और ठंड लगना, बदबूदार या धुंधला पेशाब. कई बार छोटी पथरी बिना दर्द के भी हो सकती है. पानी पीने से किडनी स्टोन कैसे रोका जा सकती है?पर्याप्त पानी पीना किडनी स्टोन से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका है. पानी पीने से पेशाब पतला रहता है. खनिज और लवण घुलकर आसानी से बाहर निकल जाते हैं. क्रिस्टल बनने की संभावना बहुत कम हो जाती है. डॉक्टर आमतौर पर सलाह देते हैं कि व्यक्ति को इतना पानी पीना चाहिए जिससे पेशाब का रंग हल्का पीला रहे. ये भी पढ़ें- गर्दन चटकाने की आदत कहीं स्ट्रोक का खतरा तो नहीं, फिजिशियन ने बताया- कब बढ़ जाती है यह परेशानी?Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.