जिन मोबाइल नंबरों से फ्राड कॉल किए जाने का दावा किया गया, उनमें से एक नंबर चंद्रभान यादव नामक व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत था, लेकिन उसके विरुद्ध कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं की गई। न्यायालय ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि जिन व्यक्तियों के विरुद्ध कोई ठोस सबूत नहीं था।