Lalo’ की कहानी का जन्म frustration से हुआ था। Ankit Sakhiya और उनकी टीम (Karan, Vicky भाई और co-writer) मुंबई के मामा Festival में हर दिन 2-3 फिल्में देखकर सोच रहे थे कि सिर्फ देखने से काम नहीं चलेगा, कुछ खुद बनाना पड़ेगा। उन्होंने decide किया कि story ऐसी होनी चाहिए जो unique हो, और inspiration मिली Taxi Driver जैसी loneliness वाली फिल्म से। फिर उन्होंने सोचा कि low-budget में कुछ नया करना है। brother और actors ready थे, camera ready था, बस focus था film बनाना, ना कि सोचना कि क्या होगा। उन्होंने deliberately किसी को भी नहीं बताया कि film बन रही है, BTS photos भी नहीं डाली। सबका मकसद clear था सिर्फ film बनानी है, चाहे flop हो जाए। टीम के हर member की first film थी, music director की भी। लेकिन dedication और focus से उन्होंने टीम बनाई और movie complete की। साथ ही Ankit कहते हैं कि जब उन्होंने दिल्ली में एक साधु से मिले, तो साधु ने कहा कि ये film उन्होंने नहीं बनाई, ये देवताओं ने बनाई, मतलब success उनका हाथ से बाहर है, ये सिर्फ krishna kripa है।