भारत समेत दुनियाभर में लगातार कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है. इस सिलसिले में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी सामने आई है. दरअसल मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट के अनुसार समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले सालों में ब्रेस्ट कैंसर वैश्विक स्तर की व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2050 तक महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के नए मामलों की संख्या 3.56 मिलियन तक पहुंच सकती है. वही अनुमानित आंकड़े 2.29 मिलियन से 4.83 मिलियन के बीच बताए गए हैं. सिर्फ मामले ही नहीं बल्कि मौतों के आंकड़े भी चिंताजनक है, रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली वैश्विक मौतें 1.37 मिलियन तक पहुंच सकती है. यह अनुमान 8.41 लाख से लेकर 20.2 लाख तक के दायरे में है. वहीं मौजूदा समय में हर साल करीब 7.64 लाख मौतें हो रही है जो आने वाले 25 साल में 44 प्रतिशत तक बढ़ सकती है.अगले 25 साल में 44 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं मौतेंइस रिसर्च में बताया गया है कि अगर ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग और इलाज की व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो 2050 तक सालाना मौतों की संख्या लगभग 14 लाख तक पहुंच सकती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेडिकल साइंस में प्रगति के बाद भी कई देश बढ़ते मामलों से निपटने के लिए तैयार नहीं है. वहीं कमजोर स्वास्थ्य ढांचे वाले देशों में स्थिति और खतरनाक हो सकती है.भारत में 1990 के बाद बढ़े मामलेरिपोर्ट में भारत की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है. भारत में पिछले 3 दशकों में देश में ब्रेस्ट कैंसर का बोझ 5 गुना बढ़ा है. बदलती लाइफस्टाइल, शहरीकरण, देश में मातृत्व, ब्रेस्टफीडिंग में कमी, मोटापे और शुरुआती जांच की कमी को इसके प्रमुख कारणों में गिना गया है. वहीं भारत में अब यह कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर में से एक बन चुका है, खासकर शहरी इलाकों में. इसे लेकर डॉक्टरों का कहना है कि बड़ी संख्या में महिलाओं की पहचान बीमारी के लास्ट स्टेज में होती है, जिससे इलाज कठिन हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है.अमीर और गरीब देशों के बीच भी साफ अंतरवहीं इस रिपोर्ट में यह भी साफ बताया गया है कि हाई आय वाले देशों में नए मामलों की दर स्थिर है और मृत्यु दर में कमी आई है. इसका कारण बेहतर स्क्रीनिंग, समय पर जांच और आधुनिक उपचार व्यवस्थाएं हैं. वहीं कम और मिडिल आय वाले देशों में नए मामलों और मौतों दोनों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. इन देशों में रेडियोथेरेपी मशीनों की कमी, कीमोथेरेपी दवाइयों तक सीमित पहुंच और इलाज का ज्यादा खर्च बड़ी समस्या है. वहीं वैश्विक स्तर पर नए मामलों में इन देशों की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत है, लेकिन ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी कुल बीमारियों और समय से पहले मौतों में इनकी हिस्सेदारी 45 प्रतिशत से ज्यादा है.ये भी पढ़ें-3 साल में इस महिला ने घटाया 72 किलो वजन, केवल 7 आसान स्टेप्स फॉलो कर आप भी हो सकती हैं स्लिमDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.