Solar and lunar eclipses impact: साल 2026 का पहले सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा और साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को फाल्गुन शुक्ल की पूर्णिमा तिथि पर लगा. एक पखवाड़े (15 दिनों) में दो ग्रहण (सूर्य और चंद्र) का होना ज्योतिषीय रूप से अशुभ माना जाता है, जो महाभारत काल की तरह वैश्विक अशांति, युद्ध और प्राकृतिक आपदा के संकेत देता है.यह स्थिति देश-दुनिया में राजनीतिक तनाव, आर्थिक उथल-पुथल, और स्वास्थ्य संकट में वृद्धि का कारण बन सकती है.Guru Margi 2026: 11 मार्च को बृहस्पति होंगे मार्गी, 120 दिन बाद बदल जाएगी किस्मत, इन 5 राशियों पर बरसेगा धनहिंदू धर्म में ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है- अनीष पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि साल 2026 में यह अजीब संयोग बन रहा है कि सिर्फ 15 दिन के अंतराल में ही दो ग्रहण लगे. साल 2026 का पहले सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा और साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन शुक्ल की पूर्णिमा तिथि पर 3 मार्च को लगा.हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण, दोनों को भी अशुभ माना गया है. देशों के बीच युद्ध होगा. आतंकवाद का सफाया होगा. सेना की हलचल बढ़ेगी. बता दें साल 2025 की शुरुआत में भी 15 दिन के अंतराल में चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण लगा था.धुलंडी यानी होली के दिन 14 मार्च 2025 को चंद्र ग्रहण लगा था और ठीक 15 दिन बाद 29 मार्च 2025 को सूर्य ग्रहण लगा था. इससे पहले साल 2022 में 25 अक्टूबर 2022को सूर्य ग्रहण और 8 नवंबर 2022को चंद्र ग्रहण था. साल 1979 में 22 अगस्त 1979 को सूर्य ग्रहण और 6 सितंबर 1979 को चंद्र ग्रहण हुआ था. ठीक ऐसा ही योग इस साल भी बना है. सूर्य ग्रहण के बाद इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंगज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि बीती 17 फरवरी को साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगा था और इसके कुछ दिन बाद ही इजरायल, ईरान, अमेरिका और मिडिल ईस्ट के कई देशों में जंग छिड़ गई है.ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद अब मध्य पूर्व में इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब कई अन्य देशों की भागीदारी के कारण व्यापक रूप ले चुका है. रूस और यूक्रेन का युद्ध पहले से ही चल रहा है, वहीं यूरोप के कुछ देश और खाड़ी क्षेत्र भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस संघर्ष से जुड़े हुए हैं.साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च 2026 को लगा. यह खण्डग्रास चंद्र ग्रहण था. यह ग्रहण भारत के साथ साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई देशों में इसको देखा गया. चूंकि भारत में यह ग्रहण दिखेगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य था. इसके बाद से मिसाइल हमले, सीमाई झड़पें या अचानक सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ गई.जानिए ये समय अशुभ क्यों हैं?ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि होलिका दहन, चंद्र ग्रहण सूर्य, मंगल और राहु की युति, रौद्र संवत्सर यह सब स्थितियां शुभ नहीं है. भूकंप, वायुयान दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा, महामारी और सबसे विशेष बात किसी महत्वपूर्ण राजनेता के जीवन पर अचानक संकट आम जनमानस को स्तब्ध कर देगा.भारत के पड़ोसी देशों द्वारा षड्यंत्र और किसी आतंकवादी हमले की प्रबल संभावना है. ऐसी विषम परिस्थितियों में आम जनमानस को अपने इष्ट से प्रार्थना करनी चाहिए कि सर्वत्र शांति बनी रही. भारत के धर्म की मूल भावना भी यही शिक्षा देती है कि विश्व का कल्याण हो प्राणियों में सद्भावना हो.घटनाएं दे रही हैं संकेतभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि दूसरी स्थिति होली के पहले कुंभ राशि में 23 फरवरी 2026 से सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु की युति से एक शक्तिशाली पंचग्रही योग बना है. सूर्य, मंगल और राहु की युति कभी शुभ फल नहीं देती.दिसंबर 2019 में दिसंबर में धनु राशि में छ: ग्रह एक साथ आये थे,और सूर्य ग्रहण भी था. इसके बाद भारत सहित दुनिया ने कोविड का कठिन दौर झेला था. इस वर्ष भी एक पखवाड़े में दो ग्रहण और कुंभ राशि में बन रही ग्रहों की यह स्थितियां पूरे विश्व में हलचल पैदा कर गई.विश्व में युद्ध की स्थिति बनेगी जिसमें कई देश प्रभावित होंगे. कुंभ राशि में राहु, मंगल और सूर्य की युति विध्वंसकारी योग बनाएगा, कई देशों की सत्ता और शासन हिल जायेगा, वैश्विक स्तर पर यह योग विनाशकारी साबित होगा.राहु-मंगल योगभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस समय राहु और मंगल का प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण है. मंगल सेना, अग्नि, युद्ध और आक्रामकता का कारक है, जबकि राहु विस्फोट, भ्रम, अचानक घटनाओं और रणनीतिक छल का प्रतीक है.23 फरवरी से सक्रिय यह योग 2 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा. यह योग युद्ध को सीमित रखने के बजाय विस्तार देने की प्रवृत्ति रखता है. इजरायल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष टकराव और अमेरिका की भागीदारी इस योग के अनुरूप दिखाई देती है.इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के युद्ध में भी अचानक तेज गतिविधि देखी जा सकती है. यह समय सत्ता संघर्ष को और तेज कर सकता है.मजबूत भूमिका निभा सकता है भारतभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वर्तमान में मंगल और राहु का प्रभाव भारत के लिए सीमाई गतिविधियों को बढ़ा सकता है. पूर्वी सीमा, विशेषकर बांग्लादेश की दिशा में गतिविधियां बढ़ सकती हैं.आसाम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राजनीतिक तनाव और जनआक्रोश की स्थिति बन सकती है. हालांकि वे स्पष्ट करती हैं कि भारत पूर्ण युद्ध में शामिल नहीं होगा. भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अधिक संतुलित रहेगी और कूटनीतिक स्तर पर भारत मजबूत भूमिका निभा सकता है.ग्रहण और युद्ध की संयुक्त स्थिति का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहेगा. सोना और धातु क्षेत्र मजबूत हो सकते हैं. तेल की कीमतों में वृद्धि संभव है, जिससे महंगाई बढ़ेगी. अनाज और आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं.बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं. 5 जून के बाद गुरु का गोचर भारत के लिए सकारात्मक रह सकता है. इस समय भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और मजबूत हो सकती है.रौद्र संवत्सर का आरंभभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 19 मार्च को रौद्र नामक संवत्सर शुरू हो रहा है, 19 मार्च को अमावस्या में प्रतिपदा के क्षय होने से संवत् का प्रथम दिन क्षय को प्राप्त है ,संवत् रौद्र नाम का है lयह दोनों स्थितियां शासन सत्ता और आम जनमानस में टकराव की स्थिति बनायेगा. सूर्य,मंगल, राहु की युति जब कभी होती है तब तब सत्ता की श्रेष्ठता का शिखर झुकता है. सत्ता और शासन का विकृत रूप दिखता है.यदि इसी योग के साथ साथ बृहस्पति एक संवत के भीतर त्रिराशि (तीन राशियों में गोचर) स्पर्श करते हैं तब धर्म जगत में विप्लव उठता है l संत ही एक दूसरे के विरुद्ध जहर उगलने लगते हैं l एक संत दूसरे संत को प्रताड़ित करने लगता है, मर्यादा कलंकित होने लगती है. जब तक बृहस्पति कन्या राशि में नहीं चले जाते तब तक यह दुर्योग अपना असर दिखाएगा.2022 में मोरबी हादसाभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि इससे पहले साल 2022 में 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण और 8 नवंबर को चंद्र ग्रहण था. साल 1979 में 22 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 6 सितंबर को चंद्र ग्रहण हुआ था. ठीक ऐसा ही योग इस साल भी बना है.रविवार 30 अक्टूबर 2022 को गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना सस्पेंशन ब्रिज टूट गया. उस समय पुल पर करीब 500 लोग थे, जो नदी में जा गिरे. इस हादसे में 190 लोगों की मौत हो गई.साल 2022 से पहले 1979 में भी मच्छु नदी का डैम टूटने से हादसा हुआ था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे. 2022 और 1979 के इन दोनों हादसों में एक बात कॉमन है कि उस समय भी सूर्य और चंद्र ग्रहण हुए थे. ज्योतिष के ग्रंथ बृहत्संहिता में ग्रहण के बारे में भविष्यवाणियां की गई हैं.इस ग्रंथ में लिखा है कि जब-जब एक ही महीने में दो ग्रहण एक साथ होते हैं, तब-तब दुनिया में के हादसों की वजह से जनहानि होती है.1979 में भी हुए थे ऐसे ही हादसेभविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि 43 साल पहले 11 अगस्त 1979 को भी मोरबी में डैम टूटने से बाढ़ आ गई थी और हजारों लोग मारे गए थे. उस साल 22 अगस्त को सिंह राशि में सूर्य ग्रहण हुआ था.इसके बाद 6 सितंबर को कुंभ राशि में चंद्र ग्रहण हुआ था. अक्टूबर-1979 में फिलीपींस में तूफान आया था, जिसमें बड़ी जनहानि हुई थी. ठीक ऐसे ही हादसे 2022 में भी हो रहे हैं.बृहत्संहिता के अनुसार दो ग्रहणों का असरकुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रंथ बृहत्संहिता के राहुचाराध्याय में लिखा है कि जब दो-दो ग्रहण एक साथ एक ही महीने में होते हैं तो तूफान, भूकंप, मानवीय भूल से बड़ी संख्या में जनहानि होने के योग बनते हैं.एक ही महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण होते हैं तो सेनाओं की हलचल बढ़ती है. सरकारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. प्राकृतिक आपदा आने के योग रहते हैं.ग्रहण योग का पड़ेगा व्यापक प्रभावभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि विश्व के नजरिए से देखा जाए तो इस दौरान ग्रहों के प्रभाव से दो राष्ट्रों के मध्य तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. राष्ट्र अध्यक्षों के मध्य वाक् युद्ध की स्थिति बन सकती है.अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के दृष्टिकोण से बड़ी नकारात्मक सूचना प्राप्त हो सकती है. लेकिन पद प्रतिष्ठा के लिए यह समय महिलाओं के लिए ठीक है. बौद्धिकता , नए अन्वेषण, व्यापारिक दृष्टिकोण से यह अवधि शुभ फल प्रदायक साबित होगा.ग्रहण से तीन महीने तक की अवधि में आम जनमानस के स्वास्थ्य में अवरोध, सुख में कमी ,नए रोगों का उत्पन्न होना , नए रोगों के आने से या होने से सुख में कमी होना ,आपसी मतभेद मनमुटाव, राजनीतिक दलों में कटुता का भाव. बड़े वाहन की दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.भारतीय रुपए का ह्रास हो सकता है. व्यापारिक दृष्टिकोण से यह समय ठीक रहेगा. आर्थिक दृष्टिकोण से समय ठीक रहेगा एवं बौद्धिक दृष्टिकोण से भी यह समय उपयुक्त रहेगा.शुभ-अशुभ प्रभावभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि देशों के बीच युद्ध होगा. आतंकवाद का सफाया होगा. सेना की हलचल बढ़ेगी. प्राकृतिक आपदा के साथ अग्नि कांड भूकंप गैस दुर्घटना वायुयान दुर्घटना, महामारी , दुर्घटना, राजनीतिक उठापटक, जातिवाद, धार्मिक उन्माद होने की संभावना.विश्व में कुछ हिस्सों में हवा के साथ बारिश रहेगी. भूकंप या अन्य तरह से प्राकृतिक आपदा आने की भी आशंका है. जनजीवन सामान्य होगा. माैसम भी बदलेगा और बारिश भी अच्छी हाेगी.विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा. पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा. खाने की चीजों की कीमतें सामान्य रहेंगी. दुर्घटनाएं आगजनी आतंक और तनाव होने की संभावना.आंदोलन धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, वायुयान दुर्घटना, विमान में खराबी, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होगा. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे. सत्ता संगठन में बदलाव होंगे. मनोरंजन फिल्म खेलकूद एवं गायन क्षेत्र से बुरी खबर मिलेगी. बड़े नेताओं का दुखद समाचार मिलने की संभावना.करें पूजा-पाठ और दानभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि ग्रहण के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए. हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें. भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए. महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए.Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.