LPG Cylinder Crisis: मंदिरों तक पहुंचा सिलेंडर का संकट, भारत के इन प्रसिद्ध मंदिरों में भोज में हुई कटौती

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Gas Cylinder Shortage in Temple: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण भारत में गैस सिलेंडर की कमी अब लोगों की परेशानी का सबब बन गई है. इतना ही नहीं गैस सिलेंडर की आपूर्ति में आयी बाधा का असर होटल-रेस्टोरेंट के अलावा अब धार्मिक स्थलों पर भी दिखने लगा है.भारत के बड़े-बड़े मंदिर जैसे अयोध्या का राम मंदिर, महाराष्ट्र का शिरड़ी साईं बाबा मंदिर आदि. मंदिर में एलपीजी गैस सिलेंडर न होने के कारण क्या-क्या बदलाव हुए हैं जान लें.अयोध्या राम मंदिरअयोध्या में राम मंदिर परिसर की राम रसोई में रोजाना 10 हजार लोग भोजन करते हैं.लेकिन गैस सिलेंडर की कमी के चलते यहां का भोजन प्रभावित हुआ है. फिलहाल लकड़ी और कोयले के चूल्हों पर भोजन तैयार किया जा रहा है. लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय लगता है, इसलिए वहां तीन वक्त के भोजन की व्यवस्था फिलहाल दो वक्त तक सीमित हो गई है.नोएडा (स्कॉन मंदिर)LPG गैस की किल्लत से नोएडा का स्कॉन मंदिर भी अछूत नहीं है. इस्कॉन मंदिर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने से भगवान का भोग तैयार करने में भारी दिक्कतें आ रही हैं. मंदिर में भोग देसी चूल्हे पर बन रहा,  पहले यहां भोग में 4-5 पकवान बनते थे लेकिन अब भक्तों को सिर्फ कड़ी-चावल ही दिया जा रहा है.महाराष्ट्र (शिरडी साईं बाबा मंदिर)महाराष्ट्र के शिरडी साईं बाबा मंदिर में एलपीजी गैस की कमी से प्रसाद वितरण में  गैस की बचत करने के लिए साई संस्थान ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रसाद वितरण में बदलाव किया है. अब साई भक्तों को केवल एक ही लड्डू प्रसाद पैकेट दिया जा रहा है. हालांकि यहां पहले से मौजूद सौर ऊर्जा के कारण भोग बनाने में मदद मिल रही है.दीघा (जगन्नाथ मंदिर)दीघा के जगन्नाथ मंदिर में पहले जहां हर दिन लगभग 3000 भक्तों को भोग खिलाया जाता था, वहीं अब इसे घटाकर 700 लोगों तक सीमित कर दिया गया है. मंदिर ट्रस्टी बोर्ड का कहना है कि रसोई गैस की कमी दूर होने तक यह सख्ती जारी रहेगी.Chaitra Navratri 2026 Colors: चैत्र नवरात्रि के 9 रंग, जानें किस दिन पहनें कौन से रंग के कपड़ेDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.