एमपी हाईकोर्ट में लगी जनहित याचिका में आरोप लगाया था कि लेबड़-जावरा सड़क पर लगभग 605 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले 1300 करोड़ रुपये से अधिक टोल वसूला जा चुका है।