सूरत का एक तथाकथित योग गुरु रातोंरात अमीर बनने की ऐसी राह पर चढ़ गया कि घर के एक कोने में ही कलर प्रिंटर लगाकर ‘लक्ष्मीजी’ छापने लगा। सेवा के नाम पर चल रहे योग आश्रम के संचालक ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।