सवाल– मेरी उम्र 32 साल है और मैं पेशे से इंजीनियर हूं। छह महीने पहले बॉयफ्रेंड के साथ ब्रेकअप हुआ। ब्रेकअप के बाद उसके सब दोस्तों ने भी मुझसे बात करनी बंद कर दी, सारे कनेक्शन तोड़ लिए। हम 7 साल से रिलेशनशिप में थे, हमारे सारे फ्रेंड्स कॉमन थे। अब अचानक मैं बिल्कुल अकेली हो गई हूं। कोई मुझे कॉल नहीं करता, मुझसे मिलता नहीं। मैं मेंटली बहुत स्ट्रेस्ड हूं। क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। आप इस वक्त जिस मन:स्थिति से गुजर रही हैं, वो काफी परेशान करने वाली है। 7 साल के लंबे रिलेशनशिप के बाद ब्रेकअप अपने आप में तकलीफदेह बात है। लेकिन अभी आप जो फील कर रही हैं, वो सिर्फ ब्रेकअप की तकलीफ नहीं है। उसके साथ एक दुख और जुड़ गया है, जिसे मनोविज्ञान की भाषा में ‘घोस्टिंग’ कहते हैं। घोस्टिंग वह होती है, जब कोई व्यक्ति या कभी-कभी पूरा सामाजिक समूह बिना कोई स्पष्ट कारण बताए अचानक सारे संपर्क और संवाद खत्म कर देता है। आपके सारे कॉमन दोस्तों ने भी ऐसा ही किया। अचानक बिना किसी कारण या एक्सप्लेनेशन के बात करना बंद कर दिया। यह अनुभव व्यक्ति को भ्रम, कनफ्यूजन, रिजेक्शन और सेल्फ डाउट की ओर ले जा सकता है। सोशल रिजेक्शन पर हुए मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सामाजिक तौर पर अस्वीकार किए जाने पर मस्तिष्क में ‘सोशल पेन नेटवर्क’ एक्टिव हो सकता है। ये पेन नेटवर्क ब्रेन का वही हिस्सा होता है, जो शरीर में कहीं फिजिकल पेन या तकलीफ होने पर एक्टिव हो जाता है। इस तरह देखें तो घोस्टिंग सिर्फ एक सामाजिक घटना नहीं है। मनुष्य के मन और शरीर पर पड़ने वाला उसका प्रभाव और उससे पैदा होने वाली भावनात्मक प्रतिक्रिया बहुत गहरी और तकलीफदेह हो सकती है। घोस्टिंग क्या है? घोस्टिंग (Ghosting) एक ऐसा व्यवहार है, जिसमें कोई व्यक्ति बिना किसी सूचना के, बिना कोई कारण बताए या बिना बातचीत के अचानक सारे कम्युनिकेशन खत्म कर देता है। जैसे मैसेज, फोन कॉल, घर आना, मिलना या सोशल मीडिया कनेक्शन। आसान शब्दों में कहें तो- "जब कोई इंसान दोस्ती, रिश्ते, संवाद के बीच में ही अचानक 'गायब' हो जाए और कोई जवाब न दे तो उसे घोस्टिंग कहते हैं। घोस्टिंग तब मानी जाती है, जब– लोग घोस्टिंग क्यों करते हैं? लोग जीवन में कई बार अलग–अलग कारणों से घोस्टिंग कर सकते हैं। इसके संभावित कारण नीचे ग्राफिक में देखिए। फिर हम इसके बारे में विस्तार से बात करेंगे– आइए, अब इन पॉइंट्स के बारे में विस्तार से बात करते हैं। कन्फ्रंटेशन का डर सीधे “ना” कहने या साफ शब्दों में बताकर बातचीत खत्म करने में असहज महसूस करना। कॉन्फ्लिक्ट अवॉइडेंस कुछ लोग कठिन बातचीत से बचने और कॉन्फ्लिक्ट को अवॉइड करने के लिए चुपचाप दूर हो जाते हैं। ओवरवेल्म महसूस करना कई बार बातचीत का डर या रिश्ते का दबाव व्यक्ति को बहुत ओवरवेल्म करने वाला लग सकता है। इमोशनल दबाव महसूस करने पर भी कई बार लोग संवाद की बजाय घोस्टिंग का रास्ता चुनते हैं। ग्रुप लॉयल्टी डायनेमिक्स जब दो पक्षों के बीच ब्रेकअप होता है, तो अकसर कॉमन दोस्तों के सामने ये दुविधा होती है कि वो किसका पक्ष लें। ऐसे में लॉयल्टी का पलड़ा किसी एक पक्ष की ओर ज्यादा झुका हो सकता है। कई बार लोग अनजाने में ही किसी एक पक्ष के साथ खड़े हो जाते हैं। इमोशनल इममैच्योरिटी कुछ लोग भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि सही और समझदार फैसले ले सकें। उनमें भावनात्मक स्पष्टता और संवाद की क्षमता सीमित होती है। कम्युनिकेशन स्किल घोस्ट न करने और अपने विचार और फैसले दूसरे व्यक्ति को बताने के लिए कम्युनिकेशन स्किल भी बहुत जरूरी है। हो सकता है, कोई दोस्ती खत्म ही करना चाहता हो, लेकिन उसे ये पता न हो कि ये बात वो बिना दिल दुखाए फैक्चुअल तरीके से सामने वाले को बताए कैसे। घोस्टिंग के बारे में सबसे जरूरी बात यहां जो बात समझना सबसे ज्यादा जरूरी और महत्वपूर्ण है, वो ये कि घोस्टिंग हमेशा उस व्यक्ति के इमोशनल बिहेवियर और पैटर्न के बारे में बताती है, जो ऐसा कर रहा है, न कि उसके बारे में जिसके साथ ऐसा किया जा रहा है। कहने का आशय ये है कि यह व्यवहार हमेशा करने वाले व्यक्ति के व्यवहार और भावनात्मक शैली का प्रतिबिंब होता है। मजबूत और बुद्धिमान लोगों पर घोस्टिंग का असर ऐसा नहीं है कि घोस्टिंग सिर्फ इमोशनली कमजोर लोगों को ही प्रभावित करती है। कई बार भावनात्मक रूप से बहुत मजबूत और बुद्धिमान लोग भी घोस्टिंग के महीनों बाद तक उस व्यक्ति के बारे में सोचते रहते हैं, जो अचानक बिना कुछ कहे–सुने उनकी जिंदगी से भूत की तरह गायब हो गया। यह केवल भावनात्मक कमजोरी नहीं होती बल्कि हमारे मस्तिष्क और अटैचमेंट सिस्टम की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। अटैचमेंट साइकोलॉजी बताती है कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक हमारे जीवन में रहता है और जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है, तो मस्तिष्क में उससे जुड़े न्यूरल पाथवे मजबूत हो जाते हैं। ऑक्सिटोसिन और डोपामिन जैसे न्यूरोकेमिकल्स उस संबंध से जुड़ी सकारात्मक यादों को और मजबूत बनाते हैं। एक स्ट्रॉन्ग मेंटल–इमोशनल–न्यूरल कनेक्शन के बाद जब संबंध अचानक खत्म हो जाता है, तो मस्तिष्क का अटैचमेंट अलार्म सिस्टम एक्टिव हो जाता है। व्यक्ति बार-बार उसी व्यक्ति के बारे में सोचता रहता है। घोस्टिंग की स्थिति में यह प्रतिक्रिया ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि कोई स्पष्ट क्लोजर नहीं मिलता। मस्तिष्क लगातार “क्यों” का उत्तर खोजता रहता है। इसे साइकोलॉजी में “एंबीग्यूअस लॉस” कहा जाता है, जहां अंत क्लीयर नहीं होता और लंबे समय तक पुराने संबंध का मेंटल रूमिनेशन (मानसिक पुनरावृत्ति) चलता रहता है। इसलिए अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है कि संबंध खत्म होने के बाद भी आप पुराने रिश्ते के बारे में लगातार सोच रही हैं, उसे पूरी तरह भुला नहीं पा रही हैं तो यह आपकी समझदारी या बुद्धिमत्ता की कमी नहीं है। यह आपके मस्तिष्क के अटैचमेंट सिस्टम की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। क्या ये घोस्टिंग है? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 6 सवाल हैं। आपको इन सवालों को ध्यान से पढ़ना है और 0 से 3 के स्केल पर इसे रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल का आपका जवाब अगर 'नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'बहुत अधिक' है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। नंबर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। अगर आपका टोटल स्कोर 0 से 5 के बीच में है तो ये सामान्य ब्रेकअप रिएक्शन है। लेकिन अगर आपका स्कोर 11 से 15 के बीच में है तो यह ब्रेकअप के बाद घोस्टिंग से पैदा हुआ मेंटल–इमोशनल स्ट्रेस है। घोस्टिंग का इमोशनल इफेक्ट जब किसी व्यक्ति को घोस्ट किया जाता है तो उसमें मुख्यत: तीन तरह की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। तीनों पॉइंट नीचे ग्राफिक में देखें, फिर हम इसके बारे में थोड़ी डिटेल में बात करेंगे। 1. अनिश्चितता महसूस होना घोस्टिंग का मतलब ही है कि रिश्ते को एक लॉजिकल क्लोजर नहीं मिला है। कहानी न किसी नतीजे पर पहुंची, न ठीक से खत्म हुई। ऐसे में हमेशा एक तरह की अनिश्चितता महसूस होती रहती है, लगता है कहीं बीच में अटके हुए हैं। 2. खुद को जिम्मेदार समझना हालांकि जैसाकि मैंने ऊपर कहा, घोस्टिंग हमेशा ऐसा करने वाले के इमोशनल बिहेवियर का रिफ्लेक्शन होती है, लेकिन असल में होता ये है कि जिसे घोस्ट किया गया है, वही खुद को दोषी और जिम्मेदार मानने लगता है। घोस्टिंग की स्थिति में यह दूसरी सबसे स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। 3. सेल्फ रिस्पेक्ट कम होना घोस्टिंग का शिकार व्यक्ति इसके लिए खुद को जिम्मेदार मानता है और उसके भीतर सेल्फ रिस्पेक्ट का भाव कम होता है। उसे लगने लगता है कि उसमें ही कुछ कमी है। घोस्टिंग रिकवरी प्रोग्राम CBT (कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी) पर आधारित स्टेप 1: तथ्य और कहानी अलग करना घोस्टिंग के बाद मन अक्सर अपनी एक कहानी बुन लेता है। घटना– दोस्तों ने दूरी बना ली। मन की कहानी– मैं ही गलत हूं। संतुलित विचार– वे पक्ष चुन रहे होंगे। इसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। इसे ‘कॉग्निटिव रीफ्रेमिंग’ कहते हैं। जब हम अपने मन में बुनी गई कहानी को ज्यादा तथ्यात्मक और तार्किक बात से रीप्लेस करते हैं। इससे हमें अपने मन में बुनी गई बात को ठीक से समझने का मौका मिलता है। स्टेप 2 अपने साथ न्यूट्रल, निष्पक्ष होना सेल्फ हेल्प का दूसरा सबसे जरूरी कदम है अपने साथ पक्षपात न करना। अपने प्रति करुणा बरतना। आपको उन विचारों को आइडेंटिफाई करना है, जिसमें आप खुद को दोष देती हैं और फिर उसकी जगह दूसरे तार्किक सवाल रखने हैं और उसका तार्किक जवाब ढूंढना है। सेल्फ ब्लेम के कॉमन विचार CBT आधारित सवाल स्टेप 3 अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट को प्रोटेक्ट करना आप रोज एक अभ्यास करें। एक डायरी में ये 4 बातें लिखें– अभी आपका आहत सेल्फ कह रहा है कि आपमें कुछ भी अच्छा नहीं है। लेकिन जब आप ये अभ्यास करेंगी, खुद से पूछेंगी और खुद को याद दिलाएंगी कि आपकी ताकत क्या है तो इससे अपने आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद मिलेगी। स्टेप 4 सोशल रीबिल्डिंग ब्रेकअप सिर्फ एक रिश्ते का अंत होता है, ये जिंदगी का अंत नहीं होता। जिंदगी इसके बाद भी चलती रहती है, नए रिश्ते बनते हैं। आप ब्रेकअप के बाद भी अपनी सोशल लाइफ को फिर से रीबिल्ड कर सकती हैं। इसके लिए आपको छोटे–छोटे कदम उठाने होंगे, जिसे सामाजिक मनोविज्ञान में नेटवर्क रीबिल्डिंग कहते हैं। जैसेकि– घोस्टिंग से उबरने के 5 प्रैक्टिकल टिप्स 1. खुद को क्लोजर दें सामने वाले ने कोई क्लीयर जवाब, कोई क्लोजर नहीं दिया तो कोई बात नहीं। आप अपने मन में उस रिश्ते को खत्म करें। उसके खत्म होने को स्वीकार करें और आगे बढ़ जाएं। 2. “क्यों” के चक्र से बाहर आएं “क्यों” का जवाब ढूंढते रहने से मानसिक थकान बढ़ती है। इस सवाल के चक्र से बाहर आएं। खुद से कहें, ‘’इट्स ओवर। मुझे कोई जवाब नहीं चाहिए।” 3. डिजिटल बाउंड्री बनाएं बार-बार उस व्यक्ति का प्रोफाइल देखने, उसे ट्रैक करने से रिकवरी प्रोसेस धीमा हो जाता है। इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी एक बाउंड्री बनाना बहुत जरूरी है। 4. अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट बनाए रखें आपका मूल्य और महत्व इससे तय नहीं होता कि किसी ने आपको घोस्ट कर दिया। अपनी रिस्पेक्ट करें, खुद को प्यार करें। 5. नए सामाजिक अनुभव बनाएं नई सोशल एक्टिविटी में हिस्सा लें, नए दोस्त बनाएं, नई हॉबी सीखें। इस तरह अपने लिए नए अनुभव गढ़ें। एक डेली प्रैक्टिस हर रात ये तीन बातें लिखें– 1. आज मैंने कौन सा छोटा सकारात्मक कदम उठाया? 2. आज किस क्षण मुझे थोड़ा बेहतर महसूस हुआ? 3. आज मैंने अपने बारे में क्या अच्छा देखा? प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी अगर नीचे दिए गए पॉइंट्स में से कोई कंडीशन पैदा होती है तो मेरी सलाह है कि आपको प्रोफेशनल हेल्प लेने के बारे में सोचना चाहिए। किसी मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से मिलना उपयोगी हो सकता है। इन स्थितियों में प्रोफेशनल हेल्प लें– • अगर उदासी दो सप्ताह से अधिक रहे। • अगर नींद या भूख प्रभावित हो। • अगर काम पर ध्यान कम हो जाए। • अगर जीवन निरर्थक लगने लगे। अंतिम विचार घोस्टिंग का अनुभव बहुत कनफ्यूज करने वाला हो सकता है क्योंकि इसमें क्लैरिटी नहीं होती और क्लोजर भी नहीं होता। लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि किसी का अचानक गायब हो जाना उस व्यक्ति की इमोशनल वायरिंग और मैच्योरिटी के बारे में बताता है। इससे आपका मूल्य या महत्व तय नहीं होता है। अपने प्रति करुणा बरतकर, खुद को महत्व और प्रिऑरिटी देकर और थोड़े से सेल्फ–कॉन्फिडेंस के साथ लोग घोस्टिंग के दुख से उबर जाते हैं। फिर से अपनी सोशल, पर्सनल लाइफ बिल्ड कर लेते हैं। ………………ये खबर भी पढ़िएमेंटल हेल्थ– हसबैंड को दूसरी औरतें भी अच्छी लगती हैं: उन्हें ओपन रिलेशनशिप चाहिए, मुझे घुटन महसूस होती है, मैं क्या करूं किसी भी स्वस्थ रिश्ते की बुनियाद आपसी सम्मान, अपनी स्वायत्तता और इच्छा से दी गई सहमति और फैसलों में बराबरी पर टिकी होती है। यदि इन चीजों में से कोई एक भी अनुपस्थित हो, तो रिश्तों में तनाव और असंतुलन पैदा हो सकता है। आगे पढ़िए…