Belly Fat And Heart Disease: दुबले दिखने पर भी हो सकता है हार्ट अटैक का खतरा, वजह जान उड़ जाएंगे आपके होश!

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Is Belly Fat Dangerous For Heart Health: हर साल वर्ल्ड ओबेसिटी डे पर एक सवाल फिर से उठता है क्या सिर्फ वजन ही असली समस्या है? लंबे समय तक लोगों की सेहत को मापने के लिए बॉडी वेट और बीएमआई को सबसे अहम माना गया. लेकिन अब कई रिसर्च यह बताती हैं कि शरीर में फैट की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि वह जमा कहां हो रहा है. वजन मापने वाली मशीन यह नहीं बता सकती कि शरीर में मसल्स ज्यादा हैं या फैट और यह भी नहीं दिखा सकती कि फैट अंदरूनी अंगों के आसपास जमा है या नहीं.क्या होता है बेली फैट?पेट के आसपास जमा होने वाला फैट, जिसे आमतौर पर बेली फैट कहा जाता है, हार्ट की बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है. यह उन लोगों में भी होता है जिनका वजन सामान्य दिखाई देता है. दरअसल शरीर में हर तरह का फैट एक जैसा व्यवहार नहीं करता. कूल्हों और जांघों के आसपास जमा फैट तुलना कम नुकसानदायक माना जाता है, लेकिन पेट के अंदरूनी हिस्से में, लिवर, पैंक्रियास और आंतों के आसपास जमा होने वाला फैट शरीर के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है.क्या होती है दिक्कत?यह अंदरूनी फैट शरीर में सूजन बढ़ाने वाले केमिकल्स छोड़ता है, इंसुलिन के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और कोलेस्ट्रॉल का संतुलन बिगाड़ सकता है.  डॉ. वरुण बंसल ने TOI को बताया कि जब दिल की सेहत की बात आती है तो सिर्फ वजन नहीं, बल्कि शरीर में फैट का वितरण ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. खासकर पेट के आसपास बढ़ती चर्बी दिल के दौरे और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के जोखिम को बढ़ा सकती है.भारत में क्या है समस्या?भारत में यह समस्या और ज्यादा गंभीर मानी जाती है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की INDIAB स्टडी के मुताबिक, कई भारतीयों में वजन सामान्य होने के बावजूद कमर का घेरा बढ़ा हुआ पाया गया, साथ ही ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी ज्यादा था. इस स्थिति को नॉर्मल वेट ओबेसिटी या मेटाबॉलिक ओबेसिटी कहा जाता है. यानी व्यक्ति देखने में दुबला लग सकता है, लेकिन पेट के अंदर जमा फैट दिल के लिए खतरा बन सकता है.इसे भी पढ़ें- Kidney Disease Symptoms: सावधान! अक्सर 'साइलेंट' होती है किडनी की बीमारी, इन संकेतों को न करें नजरअंदाजएक्सपर्ट के अनुसार भारतीयों के लिए कमर का घेरा एक अहम संकेतक माना जाता है. पुरुषों में कमर 90 सेंटीमीटर से कम और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से कम रहनी चाहिए. इसे मापना भी बहुत आसान है कि नाभि के आसपास टेप लगाकर सीधा खड़े होकर सामान्य सांस छोड़ते हुए माप लिया जा सकता है.कैसे कर सकते हैं इसको कम?पेट की चर्बी कम करने के लिए क्रैश डाइट हमेशा सही समाधान नहीं होती, क्योंकि इससे मसल्स भी कम हो सकते हैं. इसके बजाय नियमित एक्सरसाइज, खासकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त प्रोटीन वाला भोजन, कम प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट, पर्याप्त नींद और तनाव को कंट्रोल करना ज्यादा प्रभावी तरीका माना जाता है.यह भी पढ़ें: क्या खाली पेट काम करता है दिमाग ज्यादा बेहतर? जानिए फास्टिंग का मेंटल हेल्थ पर असर और फायदेDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.