16-18 करोड़ रुपये में आता है ये छोटा सा इंजेक्शन, जानिए किस बीमारी में होता है इस्तेमाल

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आज के समय में ज्यादातर बीमारियों का इलाज दवाइयों, इंजेक्शन या ऑपरेशन से हो जाता है, लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जो हमारे जीन यानी अनुवांशिक कारणों से होती हैं और उनका इलाज इतना आसान नहीं होता, खासकर छोटे बच्चों में होने वाली कुछ दुर्लभ बीमारियां बहुत गंभीर होती हैं, ऐसी ही एक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) है, जिसके इलाज के लिए एक खास इंजेक्शन आता है, जिसकी कीमत करीब 16–18 करोड़ रुपये तक होती है. यह दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में से एक मानी जाती है. तो आइए जानते हैं कि 16-18 करोड़ रुपये में कौन सा छोटा सा इंजेक्शन आता है और किस बीमारी में इस्तेमाल होता है.16-18 करोड़ रुपये में कौन सा छोटा सा इंजेक्शन आता है16–18 करोड़ रुपये की कीमत वाला छोटा सा इंजेक्शन Zolgensma होता है. यह दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में से एक मानी जाती है और इसका यूज एक गंभीर जेनेटिक बीमारी Spinal Muscular Atrophy (SMA) के इलाज में किया जाता है. यह एक जीन थेरेपी इंजेक्शन है. इसे आमतौर पर 2 साल से कम उम्र के बच्चों को दिया जाता है. यह सिर्फ एक बार दिया जाने वाला इंजेक्शन है. यह भी पढ़ें- Sock Marks On Ankles: क्या आपके पैरों पर भी घंटों बने रहते हैं मोजों के निशान, जानें किस दिक्कत का हो सकता है संकेत?किस बीमारी में इस्तेमाल होता है16–18 करोड़ रुपये के इस छोटे इंजेक्शन Zolgensma का इस्तेमाल Spinal Muscular Atrophy (SMA) बीमारी में किया जाता है.  SMA एक जेनेटिक न्यूरो-मस्कुलर डिसऑर्डर यानी अनुवांशिक बीमारी है, जो शरीर की नसों और मांसपेशियों को प्रभावित करती है. इसमें शरीर के मोटर न्यूरॉन्स ठीक से काम नहीं करते, जो मांसपेशियों को नियंत्रित करते हैं. इस बीमारी में SMN1 नाम का जीन खराब या गायब होता है, जिसकी वजह से जरूरी प्रोटीन नहीं बन पाता है.इसके कारण बच्चे की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. उसे बैठने, खड़े होने या चलने में परेशानी होती है. गंभीर मामलों में सांस लेने और निगलने में भी दिक्कत हो सकती है. SMA बीमारी में बच्चे के शरीर में एक जरूरी जीन (SMN1) सही से काम नहीं करता है. Zolgensma उस खराब जीन की जगह सही जीन की कॉपी शरीर में पहुंचाता है, जिससे मांसपेशियों की ताकत बेहतर हो सकती है. इसके लक्षण क्या हैं?SMA के लक्षण हर बच्चे में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ आम संकेत जैसे बच्चा समय पर बैठना या चलना नहीं सीख पाता, हाथ-पैर कमजोर रहते हैं, सिर को संभालने में दिक्कत, जल्दी थकान महसूस होना, सांस लेने या निगलने में परेशानी है. अगर ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है. यह भी पढ़ें- High Cholesterol In Young Age: अब छोटी उम्र से ही कोलेस्ट्रॉल का खतरा, हार्ट अटैक से बचना है तो... 11 मेडिकल इंस्टीट्यूट ने जारी की गाइडलाइनDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.