सुप्रीम कोर्ट ने मातृत्व संरक्षण को लेकर एक युगांतरकारी निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मातृत्व एक मौलिक मानवाधिकार है और इसका लाभ बच्चे के जन्म देने के तरीके के आधार पर भेदभावपूर्ण नहीं हो सकता।