थार के अलावा भी भारत में हैं शानदार रेगिस्तान, जानिए देश के 5 अनोखे डेजर्ट डेस्टिनेशन के बारे में

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भारत में जब भी रेगिस्तान की बात होती है, तो सबसे पहले राजस्थान का थार रेगिस्तान लोगों के दिमाग में आता है. जैसलमेर की सुनहरी रेत और ऊंट सफारी लंबे समय से भारत ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करती रही है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में थार के अलावा भी कई ऐसी जगह है, जहां रेगिस्तान जैसे अनोखे और अलग-अलग तरह के प्राकृतिक नजारे देखने को मिलते हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों में यह रेगिस्तानी इलाके कहीं बर्फीले पहाड़ों के बीच मौजूद है तो कहीं नमक के मैदाने के रूप में दिखाई देते हैं. कुछ जगह पर लाखों साल पुराने जीवों के अवशेष मिलते हैं तो कहीं लाल रेत के टीलों का अनोखा नजारा देखने को मिलता है. यही वजह है कि यह जगह नॉर्मल रेगिस्तान से बिल्कुल अलग एक्सपीरियंस देती है. ऐसे में अगर आप भी हर बार की रेगिस्तान ट्रिप से हटकर कुछ नया एक्सप्लोरर करना चाहते हैं तो भारत में ऐसी जगह है. चलिए आज हम आपको देश की ऐसी पांच खास जगह में बताते हैं जहां रेगिस्तान का बहुत अलग अंदाज में देखने को मिलता है. लद्दाख का कोल्ड डेजर्ट और स्टारगेजिंगलद्दाख को अक्सर भारत काेल्ड डेजर्ट कहा जाता है. ऊंचाई पर स्थित यह इलाका बर्फीले पहाड़ों और सूखे नजारों के कारण किसी दूसरे ग्रह जैसा महसूस होता है. खासकर नुब्रा वैली के आसपास का इलाका अपने अनोखे रेगिस्तानी माहौल के लिए जाना जाता है. यहां की सबसे खास बात रात का आसमान है. कम लाइट पॉल्यूशन और साफ वातावरण की वजह से यहां स्टारगेजिंग का एक्सपीरियंस बहुत शानदार होता है. यहां घूमने का सबसे अच्छा समय मई से सितंबर के बीच माना जाता है. कच्छ का रण और सफेद नमक का रेगिस्तान गुजरात में फैला ग्रेट रण ऑफ कच्छ अपने सफेद नमक के मैदानों के लिए जाना जाता है. मानसून के समय जब यहां का पानी सूख जाता है तो दूर-दूर तक फैला सफेद नमक का मैदान नजर आता है. दिन में धूप से चमकता यह इलाका और रात में चांदनी में चांदी जैसा दिखाई देता है. यहां हर साल आयोजित होने वाला रण उत्सव भी पर्यटकों के लिए बहुत लोकप्रिय है. वहीं यहां घूमने का सही समय नवंबर से फरवरी के बीच होता है.ये भी पढ़ें-T20 World Cup Final 2026: टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल ने बढ़ाए अहमदाबाद में होटलों के भाव, दाम सुनकर उड़ेंगे होशधोलावीरा के पास वुड फॉसिल पार्क गुजरात के कच्छ क्षेत्र में धोलावीरा के पास वुड फॉसिल पार्क एक अलग तरह का रेगिस्तानी अनुभव देता है. यहां जमीन में लाखों साल पुराने समुद्री जीवों के अवशेष और जीवाश्म मिले हैं, जो बताते हैं कि यह इलाका कभी समुद्र के नीचे हुआ करता था. इस इलाके की खास बात यह है कि यहां रेगिस्तान के बीच इतिहास और भूगोल दोनों को करीब से समझने का मौका मिलता है. यहां जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है. नागालैंड-मणिपुर की सीमा पर स्थित जुकू वैलीनागालैंड और मणिपुर की सीमा पर स्थित जुकू वैली आम रेगिस्तान जैसी नहीं है, लेकिन यहां की जलवायु और वनस्पति इसे एक अलग तरह का सूखा और खुला नजार देती है. यह एक ऊंचाई पर स्थित घास का मैदान है, जो मौसम के हिसाब से अलग-अलग रूप लेता है. मानसून के समय यहां फूलों के हरियाली दिखाई देती है जबकि सर्दियों में यह इलाका काफी सुखा और शांत दिखाई देता है. यहां अक्टूबर से अप्रैल के बीच का मौसम ट्रैकिंग के लिए बेहतर माना जाता है. तमिलनाडु का लाल रेत वाला थेरी काडूतमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में स्थित थेरी काडू लाल रंग के रेत के टीलों के लिए जाना जाता है. यहां की रेत में मौजूद आयरन की मात्रा की वजह से इसका रंग लाल दिखाई देता है जो इसे बाकी रेगिस्तानों से अलग बनाता है. इसे रेड सैंड डेजर्ट पर कहा जाता है. इस इलाके में रेत के टीलों के बीच नारियल और ताड़ के पेड़ और छोटे गांव दिखाई देते हैं. ये भी पढ़ें-Why Israelis Visit India After Army Training: सेना में ट्रेनिंग के बाद भारत के इस शहर में रहने आते हैं इजरायली लोग, जानें क्यों खास है यह जगह?