जंग शुरू होने के चार‑पांच दिन बाद ही मोरबी की सिरेमिक फ़ैक्ट्रियों की भट्टियाँ भी ठंडी पड़ने लगी थीं. नतीजतन लाखों मज़दूर मोरबी छोड़कर चले गए, जबकि कुछ नए काम‑धंधे की तलाश में लगे हैं.