दादा जुम्मा लाल के पोते विवेक रूठिया इस हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दावे की बात है। अगर यह दावा कानूनी रूप से सफल होता है, तो यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय मामलों में से एक होगा।