Holika Dahan 2026: होलिका दहन 2 मार्च 2026 को है. होलिका दहन की रात का शास्त्रों में विशेष महत्व है. आध्यात्मिक और तांत्रिक दृष्टिकोण से सालभर में चार रात्रियां सबसे अधिक ऊर्जावान मानी गई हैं. तंत्र और आगम शास्त्रों में होलिका दहन की रात्रि को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है, जिसे 'दारुण रात्रि' कहा जाता है. इसके अलावा इन चार रात्रियों में - कालरात्रि (दीपावली)अहोरात्रि (शिवरात्रि)मोहरात्रि (जन्माष्टमी)दारुण रात्रि (होलिका दहन)होलिका दहन की रात क्यों है सबसे शक्तिशाली ?होलिका दहन की रात्रि अर्थात दारुण रात्रि. 'दारुण' का शाब्दिक अर्थ होता है- कठोर, भयंकर या तीव्र. तंत्र में इस रात्रि को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा बहुत 'तीक्ष्ण' होती है. यह रात्रि नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और शत्रुओं के नाश के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है.आसुरी शक्तियों का अंत और चैतन्यतातांत्रिक क्रियाओं में इसे 'सिद्धि की रात्रि' कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात किए गए मंत्र जाप और अनुष्ठान अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक शीघ्र फल देते हैं. पौराणिक रूप से यह होलिका (नकारात्मकता) के दहन और प्रह्लाद (भक्ति/चेतना) के रक्षण का पर्व है. बेहद पवित्र है होलिका की अग्नियह अग्नि का पर्व है, इसलिए इस रात 'अग्नि' के माध्यम से सूक्ष्म शरीर की शुद्धि की जाती है. होलिका की अग्नि को 'पावन' माना जाता है जो संचित दोषों को भस्म करने की क्षमता रखती है.शाबर मंत्रों और तामसिक/राजसिक साधनाओं के लिए यह समय बहुत अनुकूल होता है. साधक इस रात जागकर आत्म-शक्ति को जाग्रत करते हैं.होलिका दहन के अगले दिन उसकी राख (भस्म) को शरीर पर मलना या घर के कोनों में छिड़कना नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने वाला माना गया है.उबटन का प्रयोग: शरीर पर सरसों के उबटन की मालिश कर, उसकी गंदगी को अग्नि में समर्पित करना 'रोग और शोक' के दहन का प्रतीक है.नोट- दारुण रात्रि की तीव्र ऊर्जा का लाभ लेने के लिए किसी भी गुप्त साधना को बिना योग्य मार्गदर्शन के नहीं करना चाहिए.होलिक दहन की रात के विशेष उपायउबटन मिटाएगा रोगा - शरीर पर सरसों या चने के आटे का उबटन लगाकर, उसके सूखे अंश को निकालें और एक कागज में रख लें. बाद में इसे होलिका की अग्नि में डाल दें. माना जाता है कि इससे शारीरिक परेशानियां अग्नि में भस्म हो जाती हैं.नारियल का उतारा - यदि व्यापार या नजर दोष की समस्या है, तो एक सूखा नारियल (गोला) लेकर उसे अपने ऊपर से 7 बार वार कर होलिका की अग्नि में समर्पित करें.होलिका की राख (भस्म)- रंगभरी होली वाले दिन होलिका की ठंडी राख लाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़कें. यह एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है.दीपक का विधान - ग्रहण समाप्त होने के बाद घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं और पूरे घर में कपूर का धुआं करे.Holika Dahan 2026: होली पर भद्रा और ग्रहण का साया, होलिका दहन किस मुहूर्त में करेंDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.