4 दशक और 300 से ज्यादा फिल्मों के लिए हजारों यादगार गीत, संघर्ष से शुरू हुआ 'इंदीवर' का सफर

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Shyamlal Babu Rai: श्यामलाल बाबू राय हिंदी सिनेमा के उन महान गीतकारों में से एक का नाम है, जिनके कमाल के गीत आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं. उन्होंने अपने शानदार गीतों से लाखों दिलों को छुआ. उन्हें दुनिया इंदीवर के नाम से प्यार और सम्मान देती है. चार दशकों के लंबे सफर में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों के लिए एक हजार से ज्यादा सदाबहार गीत लिखे.इंदीवर के शब्दों में सरलता, भावनाओं की गहराई और जीवन की सच्चाई ऐसी बसी है कि आज भी वे ताजगी से गूंजते हैं. इंदीवर के गीत सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं का अमर संग्रह हैं, जो पीढ़ियों तक लोगों के साथ रहेंगे. हिंदी सिनेमा के सदाबहार गीतकार इंदीवर की पुण्यतिथि 27 फरवरी को है.इंदीवर: संघर्ष से सफलता तकइंदीवर का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बरुआ सागर कस्बे में हुआ था. बचपन से ही कविता और गीत लेखन में उनकी रुचि थी. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने आजाद के नाम से कई देशभक्ति गीत लिखे. विवाह के बाद वह मुंबई आए और संघर्ष भरे दिनों से गुजरे. साल 1946 में फिल्म डबल फेस के लिए उन्होंने पहली बार गीत लिखे, लेकिन फिल्म ज्यादा नहीं चली.असली पहचान 1951 में फिल्म मल्हार से मिली, जहां उनका गीत 'बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसम' रोशन के संगीत में सुपरहिट हुआ. साल 1963 में बाबूभाई मिस्त्री की फिल्म पारस मणि में उनका गीत 'ओ नाजुक हो, नाज से भी तुम प्यार से भी प्यारी' काफी लोकप्रिय हुआ. इसके बाद उनका सफर रुका नहीं.इंदीवर की सबसे मजबूत जोड़ी संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के साथ बनी. मनोज कुमार की फिल्मों 'उपकार' और पूरब और पश्चिम में उनके गीतों ने देशभक्ति और सामाजिक संदेश को खूबसूरती से पिरोया. 'अभी तुमको मेरी जरूरत नहीं' जैसे गीत आज भी सुनने वालों को भावुक कर देते हैं. राकेश रोशन की फिल्मों में भी इंदीवर ने कमाल किया. कामचोर, खुदगर्ज, खून भरी मांग, काला बाजार, किशन कन्हैया, करण अर्जुन', और कोयला जैसी फिल्मों के गीतों ने दर्शकों के दिल जीते.इंदीवर के अमर गीत- आज भी जिंदा हैइंदीवर ने उत्तम कुमार और शर्मिला टैगोर की फिल्म अमानुष में 'दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा' गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. इंदीवर सिर्फ हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहे. उन्होंने पॉप सिंगर नाजिया हसन और जोहैब हसन के लिए भी गीत लिखे. नाजिया के 'आप जैसा कोई', 'बूम बूम', और 'चंदन सा बदन' जैसे गीतों ने युवाओं पर गहरा असर छोड़ा.इंदीवर ने दिल ने पुकारा, सरस्वती चंद्र, यादगार, सफर, सच्चा झूठा, जॉनी मेरा नाम, धर्मात्मा, हेरा फेरी, डॉन, कुर्बानी, कलाकार जैसी दर्जनों फिल्मों में अमर गीत दिए. उनके शब्दों में सरलता और गहराई का अनोखा मेल था. 27 फरवरी 1997 को इंदीवर इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनके गीत आज भी जिंदा हैं.