आपका पैसा- अपनी वसीयत जरूर बनवाएं:जानें बनाने का पूरा लीगल प्रोसेस, कौन सी इंफॉर्मेशन जरूरी, बनवाने के 10 कानूनी फायदे

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लोग जीवन भर भागदौड़ करते हैं, ताकि अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें और संपत्ति बना सकें। लेकिन इस सबके बीच अक्सर यह तय करना भूल जाते हैं कि उनके बाद इस संपत्ति का क्या होगा? इसका सबसे अच्छा हल है, वसीयत। यह एक कानूनी डॉक्यूमेंट है, जिसमें व्यक्ति ये तय करता है कि उसकी संपत्ति, बैंक बैलेंस, निवेश और अन्य कीमती चीजें उसके बाद किसे मिलेंगी। वसीयत परिवार को विवाद, तनाव और कानूनी झंझटों से भी बचा सकती है। आज 'आपका पैसा' कॉलम में वसीयत की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: रुद्र विक्रम सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट सवाल- वसीयत क्या होती है? जवाब- वसीयत एक लिखित कानूनी डॉक्यूमेंट है, जिसमें व्यक्ति ये स्पष्ट निर्देश देता है कि मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा। इसमें बैंक बैलेंस, प्रॉपर्टी, निवेश, गहने और अन्य संपत्तियों का बंटवारा तय किया जाता है। सवाल- वसीयत कौन बना सकता है? जवाब- भारत में कोई भी व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है और जो मानसिक रूप से स्वस्थ है, वसीयत बना सकता है। हालांकि, व्यक्ति को यह साबित करने में सक्षम होना चाहिए कि उसने यह डॉक्यूमेंट किसी दबाव, धोखे या लालच के बिना तैयार किया है। सवाल- वसीयत बनाना क्यों जरूरी है? जवाब- इससे व्यक्ति ये तय कर सकता है कि मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा। अगर वसीयत न बनाई जाए तो कानून अपने हिसाब से संपत्ति का बंटवारा करता है, जो व्यक्ति की इच्छाओं के खिलाफ भी हो सकता है। इसके अलावा वसीयत से परिवार में विवाद की आशंका कम हो जाती है और कानूनी प्रक्रिया भी सरल हो जाती है। यह खासतौर पर तब और भी जरूरी है, जब परिवार के कई सदस्य संपत्ति के दावेदार हों। इसके सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- वसीयत कैसे लिखें? जवाब- वसीयत लिखने का कोई तय फॉर्मेट नहीं होता, लेकिन इसमें कुछ नियमों को फॉलो करना जरूरी है। जैसेकि- इसका पूरा प्रोसेस ग्राफिक से समझिए- सवाल- वसीयत में कौन-कौन सी जानकारी होनी चाहिए? जवाब- वसीयत में आपकी पर्सनल और फाइनेंशियल जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। इसमें वसीयत लिख रहे व्यक्ति का पूरा नाम, जन्मतिथि, पता और पहचान संबंधी जानकारी होनी चाहिए। यह जानकारी आधार और पैन कार्ड के मुताबिक होनी चाहिए। इसमें अपनी सभी चल और अचल संपत्तियों का विवरण देना जरूरी है, जैसे घर, जमीन, बैंक अकाउंट, निवेश आदि। इसमें और कौन-कौन सी जानकारियां जरूरी हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या वसीयत रजिस्टर कराना जरूरी है? जवाब- भारत में वसीयत को रजिस्टर कराना अनिवार्य नहीं है। आप इसे साधारण कागज पर लिखकर भी कानूनी रूप से वैध बना सकते हैं, बशर्ते सभी आवश्यक शर्तें पूरी की गई हों। हालांकि, वसीयत का रजिस्ट्रेशन करवाने से इसकी प्रामाणिकता बढ़ जाती है और भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में इसे चुनौती देना मुश्किल होता है। रजिस्ट्रेशन से डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रहते हैं और इससे छेड़छाड़ की आशंका कम हो जाती है। सवाल- वसीयत में कौन-कौन से कानूनी शब्द होते हैं? इनका क्या मतलब है? जवाब- इसमें कई महत्वपूर्ण कानूनी शब्द होते हैं। आइए इन्हें एक-एक करके समझते हैं। जवाब- डिजिटल वसीयत एक ऐसा डॉक्यूमेंट है, जो अक्सर ऑनलाइन सुरक्षित रखा जाता है। इसमें यह लिखा होता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की डिजिटल संपत्तियां किसे मिलेंगी, जैसे- इसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि इन अकाउंट्स का एक्सेस किन लोगों को मिलेगा। यह आधुनिक समय में उतनी ही जरूरी है, जितनी पारंपरिक वसीयत। सवाल- अगर वसीयत न लिखी गई हो तो क्या होगा? जवाब- अगर वसीयत लिखे बिना ही किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार होता है। इस स्थिति में व्यक्तिगत इच्छाओं का कोई महत्व नहीं दिया जाता और संपत्ति तय कानूनी नियमों के अनुसार बांटी जाती है। सवाल- क्या वसीयत बदली जा सकती है? जवाब- हां, वसीयत को जीवित रहते किसी भी समय बदला जा सकता है। अगर आपकी संपत्ति, पारिवारिक स्थिति या इच्छाओं में बदलाव आता है तो आप नई वसीयत बना सकते हैं। इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। नई वसीयत बनाते ही पुरानी अपने आप निरस्त हो जाती है। संशोधन करते समय भी नई वसीयत की तरह ही पूरी प्रक्रिया अपनानी होती है। सवाल- क्या नॉमिनी ही वसीयत का असली मालिक होता है? जवाब- नहीं, नॉमिनी केवल ट्रस्टी होता है, वह असली मालिक नहीं होता है। उसका काम संपत्ति को सुरक्षित रखना और उसे सही वारिस तक पहुंचाना होता है। कानूनी मालिक वही होता है, जिसका नाम वसीयत में बेनीफिशियरी के रूप में लिखा होता है। सवाल- क्या वसीयत को चुनौती दी जा सकती है? जवाब- हां, वसीयत को चुनौती दी जा सकती है, लेकिन यह सिर्फ सीमित परिस्थितियों में होता है, जैसे- इसलिए इसे साफ भाषा, सही प्रक्रिया और विश्वसनीय गवाहों के साथ तैयार करना चाहिए। सवाल- वसीयत कहां सुरक्षित रखनी चाहिए? जवाब- वसीयत को सुरक्षित जगह पर रखें, लेकिन ये भी ध्यान रखें कि आपके न रहने पर यह आसानी से मिल जाए, जैसे- अगर वसीयत रजिस्टर्ड है तो इसकी कॉपी रजिस्ट्रार ऑफिस में जमा रहती है। एग्जीक्यूटर को इसकी जानकारी देनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वह इसे लागू कर सके। सवाल- संयुक्त संपत्ति (जॉइंट प्रॉपर्टी) का क्या होता है? जवाब- संयुक्त संपत्ति में आप केवल अपने हिस्से की संपत्ति को वसीयत में लिख सकते हैं। उदाहरण के तौर पर पति-पत्नी की संपत्ति में सिर्फ अपना हिस्सा ही बांट सकते हैं। इसलिए वसीयत में स्पष्ट रूप से लिखें कि कौन-सी संपत्ति व्यक्तिगत है और कौन-सी संयुक्त है, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो। ………………ये खबर भी पढ़िएआपका पैसा- क्या है ‘सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम’: रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम, जानें इंटरेस्ट रेट, कहां और कैसे खोलें खाता रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है कि अब नियमित इनकम के बिना खर्च कैसे चलेगा? अगर आपने पहले से पेंशन की कोई प्लानिंग नहीं की है, तो दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि भारत सरकार ने सीनियर सिटिजन्स के लिए ऐसी कई योजनाएं बनाई हैं, जिनसे उन्हें हर महीने तय राशि मिलती है। आगे पढ़िए…